नई दिल्ली: फ्लाईदुबई के विमान में जब सह-पायलट ने चाकू से हमला किया और विमान को क्रैश करने की कोशिश की, तब खून से लथपथ भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने आखिरी ताकत लगाकर कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया. यही एक क्लिक 174 यात्रियों की जान बचाने वाला साबित हुआ.
बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में उड़ान के दो घंटे बाद अचानक हंगामा मच गया. सह-पायलट (ओमानी नागरिक) ने कैप्टन स्मित पर कई बार चाकू से वार किए. विमान तेजी से गोता लगाने लगा और करीब 17,000 फीट नीचे गिर गया. कैप्टन ने आपातकालीन कोड 7700 और फिर हाईजैक कोड 7500 भेज दिया, जिससे इजरायल ने फाइटर जेट्स भी उड़ा दिए.
कॉकपिट का दरवाजा क्यों था इतना महत्वपूर्ण?
9/11 हमले के बाद विमानों के कॉकपिट दरवाजे बुलेटप्रूफ और मजबूत बनाए गए हैं. इन्हें बाहर से नहीं खोला जा सकता. केवल अंदर से ही खोला जा सकता है. कैप्टन स्मित फर्श पर खून से सने पड़े थे, फिर भी उन्होंने आखिरी पल में दरवाजा अनलॉक कर दिया. इससे यात्री अंदर घुस पाए. उन्होंने सह-पायलट को काबू कर लिया, जो कंट्रोल पैनल पर हमला कर रहा था. दंत चिकित्सक डॉ. शोता मुसाएव ने कैप्टन के घावों पर प्राथमिक उपचार किया और उनकी जान बचाई.
इसके बाद ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित लैंड कराया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया भर के नेताओं ने कैप्टन स्मित को हीरो करार दिया है. उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है. यह घटना साबित करती है कि सही समय पर लिया गया एक फैसला कितनी बड़ी आपदा को रोक सकता है.