नई दिल्ली: विदेश मंत्री जयशंकर ने रविवार को भारत-रूस संबंधों को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि जब भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी, तब रसिया हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा. नई दिल्ली में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत और रसिया के बीच ऐतिहासिक रूप से अच्छे संबंध रहे हैं और यह सकारात्मक अनुभव आज भी उनके रिश्तों को आकार देता है. उन्होंने कहा, ''लोग अच्छे इतिहास या बुरे इतिहास को नहीं भूलते.
1950 के दशक से समर्थन का जिक्र
जयशंकर ने याद दिलाया कि 1950 के दशक से सोवियत संघ और बाद में रसिया ने भारत का समर्थन किया, जबकि दुनिया का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के सैन्य शासन के साथ खड़ा था. उनके इस बयान में 1971 के भारत-पाक युद्ध का भी संकेत था, जब अमेरिका ने पाकिस्तान के समर्थन में बंगाल की खाड़ी में नौसैनिक बेड़ा भेजा था.
उन्होंने पश्चिमी देशों की आलोचना पर कहा कि हर देश अपने अनुभव के आधार पर रिश्तों का आकलन करता है. जिस तरह यूरोप से भारत का रसिया संबंधी दृष्टिकोण अपनाने की उम्मीद नहीं की जा सकती, उसी तरह भारत भी अपने इतिहास के आधार पर फैसले लेता है. जयशंकर ने जोर दिया कि भारत का अनुभव सकारात्मक रहा है और लगातार सकारात्मक रहा है.
यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा
ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब अमेरिका और यूरोप भारत के रसिया से तेल आयात पर सवाल उठा रहे हैं. जयशंकर ने कहा कि 1970-80 के दशक की तुलना में संबंध बदल चुके हैं और अब व्यापार, ऊर्जा और संसाधन इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं.
यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने भारत की स्थिति दोहराई कि युद्ध का अंत बातचीत, कूटनीति और वार्ता से होना चाहिए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2022 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा था कि आज का युग युद्ध का युग नहीं है. जयशंकर ने बताया कि भारत ने हाल के महीनों में रसिया और यूक्रेन दोनों से बातचीत की है, जिसमें ब्लैक सी शिपिंग, अनाज आयात, ऊर्जा निर्यात और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों जैसे मुद्दे शामिल रहे.