न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का खुलकर समर्थन किया है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवरोव ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि पश्चिमी देशों, खासकर जर्मनी और जापान को अतिरिक्त स्थायी सीटें नहीं दी जानी चाहिए.
लवरोव ने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार में पश्चिमी देशों को कोई अतिरिक्त सीट आवंटित नहीं की जा सकती, खासकर जर्मनी और जापान को, जो अब सैन्यवाद और बदले की भावना के रास्ते पर हैं.'' उन्होंने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का समर्थन जताया और स्पष्ट रूप से ब्राजील तथा भारत की स्थायी सीट की उम्मीदवारी का समर्थन किया. अफ्रीकी महाद्वीप के हितों को भी सुधार में शामिल करने पर जोर दिया.
अन्य देशों का समर्थन
मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने जी4 और एल69 के रुख का समर्थन करते हुए भारत की स्थायी सीट की उम्मीदवारी दोहराई. उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक मामलों में रचनात्मक भूमिका के अनुरूप इसे स्थायी सीट मिलनी चाहिए. पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने भी अधिक प्रतिनिधि परिषद की मांग की और अफ्रीका, ब्राजील तथा भारत को स्थायी प्रतिनिधित्व देने की वकालत की.
मार्शल द्वीप समूह ने जापान और उसके जी4 भागीदारों के लिए स्थायी सदस्यता का समर्थन किया. जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं को दर्शाने के लिए स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग की. अफ्रीकी देशों ने भी अधिक प्रतिनिधित्व की मांग दोहराई.
सिएरा लियोन के राष्ट्रपति ने कहा कि सुरक्षा परिषद अभी भी 1945 की दुनिया को दर्शाती है, जबकि अफ्रीका की आबादी 1.6 अरब से अधिक होने के बावजूद कोई स्थायी सीट नहीं है. घाना के राष्ट्रपति ने सुधार को संयुक्त राष्ट्र की वैधता और विश्वसनीयता के लिए जरूरी बताया.
वर्तमान में पांच स्थायी सदस्यों (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका) के पास वीटो पावर है. चार्टर में संशोधन के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और सभी स्थायी सदस्यों सहित दो-तिहाई सदस्य देशों की पुष्टि जरूरी है. रूस का यह समर्थन भारत की दावेदारी को मजबूती देता है.