लखनऊ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी ने यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को तेज कर दिया है. सितंबर 2026 में लखनऊ में हुई संघ-भाजपा समन्वय बैठकों में जमीनी फीडबैक, संगठनात्मक तालमेल और विधानसभा स्तर की चुनौतियों पर मंथन हुआ.
लखनऊ में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के साथ अब बीजेपी के मौजूदा विधायकों और टिकट के दावेदारों की सक्रियता भी जांच के दायरे में है. जानकारी के मुताबिक, संगठन और उससे जुड़े कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर नेताओं की पकड़, जनता के बीच छवि और क्षेत्रीय समीकरणों का फीडबैक जुटा रहे हैं. हालांकि, किसी विधायक का टिकट केवल संघ की रिपोर्ट के आधार पर कटेगा, यह अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है.
रिपोर्ट तैयार करते समय कई पहलुओं पर नजर बताई जा रही है. इनमें मौजूदा विधायक की छवि, जनता से संपर्क, संभावित दावेदार, स्थानीय मुद्दे, सामाजिक समीकरण और संगठन में सक्रियता शामिल हैं. इसके अलावा युवाओं के मुद्दों और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच बदलते राजनीतिक रुझानों को भी समझने की कोशिश की जा रही है.
रिपोर्टों के अनुसार काशी, अवध, गोरक्ष, कानपुर, मेरठ और ब्रज क्षेत्र में संघ-भाजपा के स्तर पर चुनावी तैयारियों और फीडबैक को लेकर बैठकें हो रही हैं. इन बैठकों का मकसद जमीनी स्थिति को नेतृत्व तक पहुंचाना और संगठन तथा सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाना है.
2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी की सीटें 2019 के 62 से घटकर 2024 में 33 रह गई थीं. पार्टी ने बाद में हार के कारणों की समीक्षा भी की थी. इसी अनुभव के बाद 2027 के लिए बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक फीडबैक को महत्व दिया जा रहा है. अब आने वाले महीनों में यही रिपोर्ट टिकट चयन और चुनावी रणनीति में कितनी भूमिका निभाती है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं.