दिल्ली के मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bharadwaj) और पार्टी के अन्य सदस्यों को गुरुवार को दिल्ली के चंदगीराम अखाड़े में बसों में मार्शलों की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन करते समय पुलिस ने हिरासत में ले लिया. हिरासत में लिए जाने के दौरान सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम बस मार्शलों के साथ हैं. वे गरीब हैं. उन्हें साजिश के तहत हटाया गया है. अरविंद केजरीवाल उन्हें बहाल करवाएंगे. बस मार्शल पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा उनकी सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद से ही अपनी बहाली के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. इससे पहले दिन में प्रदर्शन में शामिल हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वे इस मुद्दे पर एलजी के साथ चर्चा करने के लिए भाजपा के उनके साथ आने का इंतजार कर रहे हैं.
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम यहां लड़ने के लिए नहीं आए हैं. 26 सितंबर को दिल्ली विधानसभा में यह निर्णय लिया गया था कि 3 अक्टूबर को आप और भाजपा के सभी विधायक और मंत्री एलजी से मिलने जाएंगे और हमें जो भी कागज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जाएगा, हम उस पर हस्ताक्षर करेंगे और उन्हें (बस मार्शलों को) नियुक्त किया जाएगा. हम आज यहां आए हैं और हम भाजपा का इंतज़ार कर रहे हैं. AAP के आधिकारिक X हैंडल ने भी विरोध के बारे में पोस्ट किया और एलजी वीके सक्सेना से बस मार्शलों को बहाल करने की मांग की.
आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने कहा है कि ने कहा कि आम आदमी पार्टी के विधायक बस मार्शलों के विरोध में शामिल हुए हैं और उनकी बहाली की मांग का समर्थन किया है. एलजी साहब को जल्द ही इन बस मार्शलों को बहाल करना चाहिए ताकि वे भी अपने बच्चों और परिवार के साथ खुशी से त्योहार मना सकें. पिछले महीने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी, जो उस समय कैबिनेट मंत्री थीं, ने दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना को एक पत्र लिखा था, जिसमें उनसे बस मार्शलों की नौकरी बहाल करने का अनुरोध किया गया था.
बुधवार को एलजी सक्सेना को संबोधित अपने पत्र में, आतिशी ने कहा कि इन बस मार्शलों को मुख्य रूप से दिल्ली सरकार के नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों के माध्यम से तैनात किया गया था. हैरानी की बात है कि इस योजना के कार्यान्वयन और इसके सफल संचालन के 8 साल बाद, एक पूरी तरह से अप्रत्याशित कदम में, आपके आदेश पर अचानक उनका वेतन रोक दिया गया. उनके कॉलआउट कर्तव्यों को तुच्छ आधार पर समाप्त कर दिया गया, जिससे बस मार्शल योजना अधर में लटक गई.