नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें किसी प्राइवेट अस्पताल (मेदांता) में शिफ्ट करने की मांग फिलहाल खारिज कर दी. कोर्ट ने साफ कहा कि सफदरजंग अस्पताल में उनकी भर्ती मनमानी नहीं थी.
जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने कहा कि वांगचुक की सेहत को देखते हुए सरकार का फैसला उचित था. सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं. वांगचुक ने खुद अपनी हालत बिगड़ने के बावजूद अस्पताल में भर्ती होने से इनकार कर दिया था, इसलिए सरकार को दखल देने का अधिकार था. परिवार को उनसे बिना किसी रोक-टोक के मिलने की पूरी छूट दी गई है और उनके लिए अलग कमरा भी उपलब्ध कराया गया. मेडिकल रिपोर्ट नियमित रूप से परिवार को साझा की जाएगी.
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को तय की है. गीतांजलि आंग्मो की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा, ''वे हिरासत में नहीं हैं, उनके खिलाफ कोई केस नहीं है. क्या एक भारतीय नागरिक को अपनी पसंद का अस्पताल चुनने का अधिकार नहीं है? सरकार उनके शरीर पर कब्जा नहीं कर सकती.''
केंद्र सरकार के वकील ASG चेतन शर्मा ने कहा कि 16 जुलाई के आदेश के मुताबिक इलाज की सारी जिम्मेदारी सरकार की है. सफदरजंग और AIIMS के डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है. ब्लड टेस्ट AIIMS, सफदरजंग और प्राइवेट लैब में कराए गए. उन्हें पूरा ध्यान दिया जा रहा है. यह फैसला जंतर-मंतर आंदोलन और सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चल रहे विवाद पर बड़ा असर डालेगा.