तिरुवनंतपुरम (केरल): केरल में एक पिता की दर्दनाक आत्महत्या ने पूरे देश में पिता के अधिकारों पर जोरदार बहस छेड़ दी है. KSRTC बस कंडक्टर रंजीश (38 वर्ष) ने फैमिली कोर्ट के फैसले के बाद खुदकुशी कर ली, जिसमें कोर्ट ने उनके 8 साल के बेटे की कस्टडी पूर्व पत्नी को सौंप दी थी. रंजीश ने करीब 10 साल पहले लव मैरिज की थी. दंपति के एक बेटा हुआ. बेहतर भविष्य की तलाश में पत्नी कतर चली गई.
वहां पहुंचकर उसने कथित तौर पर दूसरी शादी कर ली और पहले पति व बच्चे का कोई संपर्क नहीं रखा. पत्नी के जाने के बाद रंजीश ने अकेले ही बेटे को 8 साल तक लाड-प्यार से पाला. KSRTC में कंडक्टर की नौकरी करते हुए वह बेटे और बूढ़े माता-पिता की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहा था. 8 साल बाद पूर्व पत्नी अचानक केरल लौटी और कटप्पना फैमिली कोर्ट में बेटे की कस्टडी की मांग कर दी.
रंजीश ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह बच्चे को पहले की तरह अच्छे से पाल सकता है, लेकिन कोर्ट ने बच्चे को मां के साथ कतर जाने की अनुमति दे दी. इस फैसले को सह न पाकर रंजीश ने आत्महत्या कर ली. रंजीश की मौत की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर कैंपेन तेज हो गया है.
लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस पिता ने 8 साल तक बच्चे को अकेले संभाला, उसे कोर्ट ने सेकेंडरी पैरेंट क्यों माना? क्या पिता सिर्फ आर्थिक जिम्मेदारी निभाने वाले एटीएम मशीन हैं? इस घटना ने फैमिली कोर्ट के फैसलों और पिता के अधिकारों पर गंभीर बहस छेड़ दी है. पुलिस ने बताया कि मौत की सही वजह की जांच चल रही है. इस मामले ने देशभर में पिताओं के अधिकारों और चाइल्ड कस्टडी कानूनों में सुधार की मांग को नई ताकत दे दी है.