नई दिल्ली: नीट पेपर लीक के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित संसद मार्च सोमवार को हिंसक रूप ले गया. प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से निकलकर संसद भवन के करीब पहुंच गए और बाद में कनॉट प्लेस समेत कई इलाकों में तोड़फोड़ व पथराव की घटनाएं हुईं. सुबह से ही प्रदर्शनकारी पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ते हुए संसद की ओर बढ़े.
रेल भवन के पास बवाल होने पर पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े. भीड़ को खदेड़ने के बाद प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस की ओर मुड़ गए, जहां उन्होंने पालिका बाजार, रीगल सिनेमा और सेंट्रल पार्क इलाके में जमकर नारेबाजी की. कुछ उपद्रवियों ने पुलिस वाहनों को निशाना बनाकर तोड़फोड़ की और पथराव शुरू कर दिया. फिरोज शाह रोड पर भी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए.
पुलिस ने हल्का बल प्रयोग और आंसू गैस के सहारे स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की. सीजेपी 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही थी. 20 जुलाई को संसद मार्च का आयोजन किया गया था. शनिवार से आंदोलन में भीड़ बढ़ी थी, जब सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया गया और सीजेपी फाउंडर दीपके ने भूख हड़ताल शुरू कर दी. सोमवार को इतनी बड़ी संख्या में लोग उमड़े कि पुलिस का इंतजाम फेल पड़ गया.
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था का सम्मान करने की अपील की है. एडिशनल सीपी राजीव रंजन ने कहा कि सभी को संयम बरतना चाहिए और अफवाहों से बचना चाहिए. यह घटना दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती है, जबकि सीजेपी का आंदोलन अब हिंसा के आरोपों में घिर गया है.