मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाए जा रहे इतिहास के एक चैप्टर पर 'छत्रपति शिवाजी सेना' ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। मुजफ्फरनगर में रुड़की रोड स्थित अपने कार्यालय पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के पदाधिकारियों ने सरकार को इस पाठ्यक्रम में बदलाव करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 7 के छात्रों के लिए 'भारत की महान विभूतियां' नाम की एक पुस्तक पाठ्यक्रम का हिस्सा है।
शिवाजी सेना के मुजफ्फरनगर जिला अध्यक्ष (और राष्ट्रीय अध्यक्ष) अर्चित आर्य ने प्रेस वार्ता में इतिहास की किताबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो इतिहास सच्चा और तथ्यात्मक हो, वही बच्चों के सामने आना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया:
"अगर अकबर सचमुच इतना महान शासक था, तो वीर महाराणा प्रताप जी कौन थे? फिर महाराणा प्रताप ने अकबर की अधीनता स्वीकार करने के बजाय जीवनभर स्वाधीनता की लड़ाई क्यों लड़ी?"
अर्चित आर्य ने दावा किया कि अकबर की नीतियां और कार्य उसे महान कहे जाने के बिल्कुल योग्य नहीं थे। उन्होंने चित्तौड़गढ़ दुर्ग के युद्ध और हेमू विक्रमादित्य के प्रसंगों का हवाला देते हुए अकबर को एक क्रूर शासक बताया। संगठन का कहना है कि वे अपने बच्चों को सच्चा इतिहास पढ़ाना चाहते हैं, गलत इतिहास नहीं।
शिवाजी सेना ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए प्रशासन और सरकार को चेतावनी दी है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे इस मांग को लेकर सबसे पहले मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट पर जाकर एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपेंगे। यदि इसके बाद भी माध्यमिक शिक्षा विभाग या सरकार ने इस अध्याय में संशोधन को लेकर कोई जल्द फैसला नहीं लिया, तो संगठन पूरे उत्तर प्रदेश की सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू करेगा।
फिलहाल, इस पूरे विवाद के तूल पकड़ने के बाद भी उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग या स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है।