रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि केवल शादी का प्रस्ताव देना और हाथ पकड़ना महिला की गरिमा भंग करने का अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक आरोपी की गलत मंशा साबित न हो. जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने रामगढ़ के गोला थाना क्षेत्र के नंदकिशोर बेदिया उर्फ गुड्डू की अपील स्वीकार कर ली और विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि व सजा को पूरी तरह रद्द कर दिया.
क्या था पूरा मामला?
21 जून 2017 को 10 वर्षीय बच्ची स्कूल से घर नहीं लौटी. परिवार और गांव वालों ने आरोपी को बच्ची का हाथ पकड़कर ले जाते देखा. अगले दिन बच्ची को छुड़ा लिया गया. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करने की कोशिश) और पॉक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत केस दर्ज किया था. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को धारा 354 के तहत दोषी ठहराया था, लेकिन पॉक्सो की धारा 8 से बरी कर दिया. आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की.
अदालत ने पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद कहा कि आरोपी ने शादी का प्रस्ताव रखा था और हाथ पकड़ा था, लेकिन अश्लील हरकत या गलत मंशा का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि धारा 354 लगाने के लिए आरोपी की आपराधिक मंशा साबित होना जरूरी है. सिर्फ शादी का प्रस्ताव और हाथ पकड़ने से यह धारा पूरी नहीं होती. आरोपी पहले ही सजा पूरी कर जेल से रिहा हो चुका है.