उत्तराखंड के देहरादून में जैसे ही धामी का बुलडोज़र गरजा को दिल्ली की एक तस्वीर तेज़ी से वायरल होने लगी. ये तस्वीर है सीएम पुष्कर सिंह धामी और पीएम मोदी की मुलकात की. बताया गया कि ये मुलाकात उत्तराखंड के विकास को लेकर थी. लेकिन जैसे ही इस मुलाकात के बीच उत्तराखंड में बुलडोज़र कार्रवाई तेज़ हुई दिल्ली में दोनों के मुलाकात की तस्वीर की चर्चा ने ज़ोर पकड़ लिया.
इस तस्वीर में क्या खास है ये आगे बताएंगे लेकिन उससे पहले ये बताते हैं कि उत्तरखंड में धामी का बुलडोज़र जब पहुंचा तो वहां क्या माहौल था? देहरादून में रिवरफ्रंट डेवलपमेंट की जमीन पर रिस्पना किनारे कुल 250 अतिक्रमण पर कार्रवाई की जानी है. जैसे ही ध्वस्तीकरण हुआ मलिन बस्तियों में हड़कंप मच गया. कई विपक्षी दलों ने भी कार्रवाई का विरोध करते हुए सड़क जाम करने की कोशिश की, हालांकि इस तरह माहौल की आशंका पहले से ही थी. इसलिए भारी पुलिस बल तैनात था.
ऐसे में पुलिस ने कार्रवाई जारी रखी. पुलिस और पीएसी के साथ एमडीडीए की टीम काठबंगला बस्ती पुल पर पहुंची और फोर्स ने बस्ती के चारों ओर घेरा बना लिया. जिसके बाद एमडीडीए की टीम जेसीबी लेकर आगे बढ़ी. अब इस बुलडोज़र कार्रवाई से राज्य की सियासत गरमाई हुई है. ऐसे में जब ये तस्वीर आई तो कयासों का बाज़ार गरमा गया.
कहा जा रहा है कि दूसरे राज्यों के सीएम बुलडोज़र चलाने से पहले पीएम से अनुमति लेते हैं. लेकिन योगी तो बस कर देते हैं. ऐसे कयास क्यों लग रहे हैं इसके लिए तस्वीर को देखिए तस्वीर में पीएम के हाथ में एक फाइल है तो सीएम धामी के हाथ में कुछ पेपर्स हैं. दोनों के बीच कुछ बात हो रही है और इधर उत्तराखंड में बुलडोज़र गरजने लगता है. इसलिए कहा जाने लगा कि धामी मोदी से बुलडोज़र करवाई की अनुमति लेने पहुंचे थे. चलिए अब ये बुलडोज़र कार्रवाई क्यों हो रही है वो बता देते हैं.
दरअसल, एनजीटी के निर्देश पर रिस्पना के किनारे वर्ष 2016 के बाद किए गए निर्माण के सर्वे में कुल 524 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे. 89 अतिक्रमण नगर निगम की भूमि पर, जबकि 12 नगर पालिका मसूरी और 11 राजस्व भूमि पर पाए गए. दूसरी तरफ नगर निगम के नियंत्रण में रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए जिस भूमि को एमडीडीए के नियंत्रण में दिया गया था.
उस पर 412 से ज्यादा अतिक्रमण होने की बात सामने आई है. नगर निगम ने आपत्तियों की सुनवाई के बाद 74 अतिक्रमण की अंतिम सूची तैयार की थी. संशोधन के बाद चूना भट्ठा, दीपनगर और बाडीगार्ड बस्ती में कुल 64 निर्माण ध्वस्त किए गए. अब परीक्षण के बाद एमडीडीए की जमीन पर चिह्नित 250 अवैध निर्माण ही सूची हैं. जिन पर कार्रवाई की रिपोर्ट 30 जून तक एनजीटी को सौंपनी है.
यानी ये प्रोजेक्ट पुराना है जिसपर अचानक से एक्शन तेज़ हो गया है. अब तस्वीर को लेकर लगने वाले इन कयासों में कितनी सच्चाई है ये बता पाना तो मुश्किल है लेकिन इस तस्वीर ने ये जरूर बता दिया की योगी और दूसरे राज्यों के सीएम के काम करने का स्टाइल कितना अलग है.