नई दिल्ली: दिव्या देशमुख ने कोनेरू हम्पी को हराकर महिला विश्व कप 2025 का खिताब जीत लिया है. कोनेरू हम्पी भी भारती की हैं. ऐसा पहली बार हुआ कि दो भारतीयों के बीच शतरंज विश्व कप का फाइनल खेला गया हो. यह मुकाबला शुरू से ही बराबरी का रहा, और रविवार को क्लासिकल राउंड ड्रॉ पर समाप्त होने के बाद फाइनल टाई-ब्रेक में पहुंचा.
टाई-ब्रेक का पहला रैपिड गेम ड्रॉ पर समाप्त हुआ, और दूसरा गेम भी ऐसा लग रहा था कि यह एक और ड्रॉ की ओर बढ़ रहा है. हालांकि, समय के दबाव में हम्पी ने कुछ गलतियां कीं, जिसने दिव्या को बढ़त दिलाई. 19 वर्षीय दिव्या ने इसका पूरा फायदा उठाया और जीत हासिल कर भारत की 88वीं ग्रैंडमास्टर बन गईं. दिव्या ने टाई-ब्रेक 1.5-0.5 से जीतकर इस ऐतिहासिक जीत को हासिल किया और शतरंज के इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया.
दिव्या हम्पी, आर. वैशाली, और हरिका द्रोणावल्ली के बाद भारत की चौथी महिला ग्रैंडमास्टर भी बन गईं. दिव्या इस मुकाबले में थोड़ी आत्म-आलोचनात्मक थीं, क्योंकि वह क्लासिकल राउंड के पहले गेम में मौकों का फायदा न उठा पाने से नाखुश थीं, जिसे उन्होंने हार की तरह महसूस किया. दोनों खिलाड़ियों ने शुरूआत में एक-दूसरे का कदम-कदम पर मुकाबला किया, इससे पहले कि हम्पी ने नाइट के साथ हमला बोला ताकि युवा खिलाड़ी की संरचना को बिगाड़ सकें.
दिव्या को फाइनल में पहली बार लंबे समय तक सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन उन्होंने जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण हासिल कर लिया. हालांकि उन्होंने हम्पी को कुछ बढ़त दी, लेकिन 19 वर्षीय खिलाड़ी ने तेजी से वापसी की और अपनी प्रतिद्वंद्वी की क्वीन ट्रेड की पेशकश को बार-बार ठुकराया. अंतिम गेम में हम्पी ने अपनी क्वीन का बलिदान दिया, और दिव्या के कुछ चेक्स के बाद खेल बराबरी पर समाप्त हुआ.
बता दें कि दिव्या देशमुख काफी कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. वह वुमन ग्रैंडमास्टर (WGM) और इंटरनेशनल मास्टर (IM) की उपाधि धारण करती हैं. वे भारत की दूसरी सबसे उच्च रैंक वाली महिला शतरंज खिलाड़ी हैं (दिसंबर 2024 तक) और कई प्रतिष्ठित खिताब जीत चुकी हैं.