ED vs Mamata Banerjee: कपिल सिब्बल की दो ऐसी दलीलें क्या थीं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट भड़क उठा... ममता बनर्जी के हाथ में दिखी हरे रंग की फाइल में क्या था, ये राज जब सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल ने खोला तो हर कोई हैरान था.. बीते दिनों PAC के दफ्तर पर हुई छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी जो फाइलें उठाकर अपने साथ ले गईं थीं, इसे लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में खूब गहमागहमी हुई...
सुप्रीम कोर्ट का सवाल: बंगाल क्यों गई थी ED ?
ED की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल का जवाब- ''अवैध कोयला घोटाले की जांच के लिए ईडी कई थी, लेकिन वहां की सरकार कह रही हम SIR डेटा जब्त करने गए थे. ये तो पहले से वेबसाइट पर है, कोई मूर्ख उसे जब्त करने जाएगा.''
कपिल सिब्बल की दलील- ''कोयला घोटाले में आखिरी बयान फरवरी 2024 में दर्ज किया गया था; तब से ED क्या कर रही थी? चुनावों के समय अचानक कार्रवाई क्यों? पश्चिम बंगाल में चुनाव का जिम्मा I-PAC के पास है। उसके पास पार्टी की कई जानकारियां है। ED को सब पता है। चुनाव के बीच में वहां जाने की क्या जरूरत थी?
‘कौन करवाता है बंगाल में चुनाव’ ?
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- ''पश्चिम बंगाल में चुनाव I-PAC कराती है या चुनाव आयोग?''
कपिल सिब्बल: ''I-PAC के पास कई तरह के आंकड़े रखे जाते हैं। जब ED वहां गई, तो उन्हें पता था कि पार्टी से संबंधित कई डेटा वहां मौजूद होंगे।
सुप्रीम कोर्ट (मजाकिया लहजे में): ''सॉलिसिटर जनरल कह रहे हैं कि अगर चुनाव के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग होती है, इसमें ED की क्या गलती है?''
ममता की फाइल में क्या था, सिब्बल ने बताया ?
कपिल सिब्बल: ''I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनाव से जुड़ी सारी जानकारी थी। ED वह जब्त करना चाहती थी। ममता सिर्फ उनका और आईफोन लेकर गई थीं। CM ने रेड में कोई दखल नहीं डाली थी।''
सुप्रीम कोर्ट: ''आपका दावा गलत है। अगर ED का इरादा कुछ जब्त करने का होता, तो वे जब्त कर लेते, लेकिन कुछ भी जब्त नहीं किया गया। हमें जांच करनी होगी। सरकार हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकती।''
कपिल सिब्बल: ''सुनवाई कल हुई थी, इस कोर्ट को ये मानना होगा कि हाईकोर्ट न्याय नहीं दे सकता''
सुप्रीम कोर्ट: ''आप मेरे मुंह में अपने शब्द नहीं डाल सकते, हम तय करेंगे क्या मानना है क्या नहीं''
हालांकि इतने पर भी कपिल सिब्बल अपनी दलील देते रहे कि ईडी के जरिए चुनाव डेटा चोरी करने की कोशिश की जा रही है... लेकिन बीते दिनों की घटना याद कीजिए, जब संदेशखाली में ईडी की टीम पर हमला हो गया था, उसे वहां सख्त सुरक्षा व्यवस्था लेकर जाना पड़ा... उससे पहले ममता बनर्जी ने सीबीआई को लेकर भी एक आदेश पारित किया था कि राज्य में एंट्री से पहले परमिशन जरूरी होगी... और इसी ढर्रे पर झारखंड भी लगता है चल रहा है... जहां ईडी के दो अधिकारियों से पूछताछ करने झारखंड पुलिस की टीम ईडी ऑफिस पहुंच गई...
ये रिपोर्ट सामने आई कि झारखंड पुलिस ने चारों तरफ से रांची के ईडी ऑफिस को घेर लिया है, ईडी ऑफिस की सुरक्षा में तैनात CISF जवानों को भी मोर्चा संभालना पड़ा. रांची पुलिस की एक टीम 20 करोड़ के पेयजल घोटाले के आरोपी क्लर्क संतोष की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत की जांच कर रही है. FIR में आरोपी क्लर्क ने ये आरोप लगाया था कि ईडी के दो अधिकारियों ने मुझे पूछताछ के दौरान टॉर्चर किया, सिर तक फोड़ दिया.
यानि ईडी की पूछताछ और उसके तरीके को लेकर सवाल उठने लगे हैं, पर असली सवाल ये है कि अगर केन्द्रीय एजेंसियों के काम में राज्य की पुलिस और सरकार ऐसे ही दखल देगी तो फिर बड़े घोटाले या बड़ी फाइलें कैसे खुलेगी...