इटावा : उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में सैयद बाबा की मजार को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. बुधवार देर रात प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मजार को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया. गुरुवार सुबह जब आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे तो वहां मजार का कोई निशान नहीं मिला. पूरी जमीन को समतल कर दिया गया था और उस स्थान पर एक पेड़ भी लगा दिया गया था.
मजार के केयरटेकर और स्थानीय लोगों का दावा है कि यह मजार करीब 800 साल पुरानी थी और क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती थी. उनका कहना है कि वर्षों से यहां लोग चादर चढ़ाने और मन्नत मांगने आते रहे हैं. अचानक हुई कार्रवाई से ग्रामीणों में नाराजगी और हैरानी देखी जा रही है.
वहीं वन विभाग ने इस कार्रवाई को नियमों के तहत बताया है. विभाग के अधिकारियों के अनुसार मजार फिशर वन क्षेत्र की सरकारी जमीन पर बनी हुई थी. वन विभाग का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत यह कदम उठाया गया. अधिकारियों के मुताबिक करीब 3000 वर्ग फीट क्षेत्र में फैली यह संरचना वन भूमि पर मौजूद थी, इसलिए इसे हटाया गया.
यह मजार इटावा शहर से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर बीहड़ क्षेत्र के फिशर वन इलाके में स्थित थी. कार्रवाई के बाद अब यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. एक ओर स्थानीय लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़ रहे हैं, वहीं प्रशासन और वन विभाग सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने की बात कह रहे हैं. मामले को लेकर क्षेत्र में बहस तेज हो गई है और लोग प्रशासन से विस्तृत जानकारी की मांग कर रहे हैं.