ढाका: बांग्लादेश में गुरुवार को 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए हुए प्रतिस्पर्धी चुनाव में सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर विजयी हुए. 78 वर्षीय आलमगीर को 255 मत मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद को 88 मत प्राप्त हुए. आलमगीर शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे.
कौन हैं फखरुल इस्लाम आलमगीर?
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर BNP के सबसे लंबे समय तक महासचिव रहे नेता हैं. उनका जन्म 26 जनवरी 1948 को ठाकुरगांव जिले में हुआ था. उन्होंने 1960 के दशक में ढाका विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति शुरू की और ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन के सक्रिय सदस्य रहे.
1971 में बांग्लादेश की आजादी के आंदोलन के दौरान उन्होंने वामपंथी स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और कुछ समय के लिए भारत में शरण ली थी. राजनीति में आने से पहले वे सरकारी सिविल सेवा में अर्थशास्त्र के शिक्षक रहे. 1986 में नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में शामिल हुए.
2001 में पहली बार ठाकुरगांव-1 से सांसद चुने गए और खालिदा जिया की सरकार में कृषि तथा नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री बने. शेख हसीना के शासनकाल में जब BNP के कई नेता जेल में थे, तब आलमगीर ने पार्टी को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई. उन्हें पार्टी का ‘संकटमोचक’ कहा जाता है.
शालीन छवि वाले नेता
आलमगीर अपनी शालीन और उदारवादी छवि के लिए जाने जाते हैं. उनकी पत्नी राहत आरा बेगम ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. उनकी दो बेटियां हैं, एक चिकित्सा वैज्ञानिक और दूसरी स्कूल शिक्षिका. पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन (शेख हसीना के करीबी) के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद यह चुनाव हुआ. यह 1991 के बाद बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद का पहला मुकाबला वाला चुनाव था.