ये किसानों का नहीं 'मोदी विरोधियों' का आंदोलन है, जानिए कैसे?

Global Bharat 15 Feb 2024 11:54: AM 3 Mins
ये किसानों का नहीं 'मोदी विरोधियों' का आंदोलन है, जानिए कैसे?

किसान आंदोलन 2.0, सिर्फ किसानों का आंदोलन नहीं है, बल्कि ये कुछ भोले-भाले किसानों के नाम पर मोदी विरोधियों की रची गई पूरी प्लानिंग है, जिसके सिलसिलेवार सबूत हम आपको अगले 60 सेकेंड में दिखाते हैं, फिर ये भी बताते हैं कि हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार को फटकार किस-किस बात पर लगी। 

30 नवंबर 2023 को कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र हुड्डा कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा के आमंत्रण पर अमेरिका जाते हैं। तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा करते हैं। 10 दिसंबर को किसान मजदूर जनआक्रोश रैली में हिस्सा लेते हैं। 11 दिसंबर को रमनदीप सिंह मान जनवरी या फरवरी के अंत में दिल्ली मार्च की घोषणा करते हैं। जो दीपेन्द्र हुड़्डा के करीबी बताए जाते हैं। 24 दिसंबर को रमनदीप सिंह मान कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से मुलाकात करते हैं। और उसके बाद 25 दिसंबर को दिल्ली मार्च का ऐलान कर देते हैं। दोबारा वो दीपेन्द्र हुड़्डा से मिलते हैं, दिल्ली में कुछ नेताओं से मिलते हैं उसके बाद 13 फरवरी को दिल्ली कूच का ऐलान कर देते हैं।

उसके बाद 11 फरवरी को राहुल गांधी ट्वीट करते हैं कि किसानों की राह में कीलें बिछाने वाले भरोसे के लायक नहीं हैं, इन्हें दिल्ली की सत्ता से उखाड़ फेंको। यानि पूरी तस्वीर देखने के बाद एक चीज साफ होती है कि कांग्रेस बड़ी सोच-समझकर इस आंदोलन का साथ दे रही है, कई लोग तो ये भी दावा कर रहे हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, इसीलिए पंजाब में किसानों को नहीं रोका जा रहा, पर हरियाणा की बीजेपी सरकार उन्हें दिल्ली आने से रोक रही है। भगवंत मान की सरकार और कांग्रेस पार्टी मिलकर किसानों को ये बताना चाहती है कि बीजेपी उनकी हितैषी नहीं है। राजनीतिक पार्टियों के अलावा विदेश में बैठे कई देशविरोधी ग्रुप भी किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।

खालिस्तानी गुरपतवंत सिंह पन्नू वीडियो जारी कर समर्थन कर रहा है, जो ये बताता है किसानों की आड़ में कुछ लोग देश के खिलाफ प्लानिंग बनाने में लगे हैं। जिस तरह से अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस ने अडाणी के खिलाफ झूठी रिपोर्ट छापकर हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की, ठीक वैसी ही कोशिश सोरोस जैसे लोग किसान आंदोलन को लेकर भी कर रहे हैं। ये बात बड़े-बड़े किसान नेताओं तक भी पहुंची है, शायद इसीलिए इस बार के किसान आंदोलन से कई बड़े किसानों ने दूरी बनाई हुई है, क्योंकि ये आंदोलन किसानों का काम और राजनीतिक आंदोलन ज्यादा नजर आ रहा है, चूंकि प्रदर्शन सबका अधिकार है, इसलिए अदालत भी इन्हें रोकने का आदेश नहीं दे रही, बल्कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जब याचिका पहुंची तो जज साहब ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसान केवल आपके राज्य से गुजर रहे हैं, उन्हें आने-जाने का अधिकार है, फिर आपने सीमा क्यों बंद कर दी। क्या वे हरियाणा में आंदोलन कर रहे हैं, आप सड़कें क्यों बाधित कर रहे हैं।

चूंकि सड़कें बंद होने से आम आदमी को परेशानी हो रही है, इसलिए आम आदमी भी अपने हक की मांग कर रहा है, अब देखने वाली बात ये होगी कि इन सारे मामलों से सरकार कैसे निपटती है। हरियाणा सरकार का दावा है कि किसानों ने ट्रैक्टर को मोडिफााई किया हुआ है, उसमें वो कुछ भी रख सकते हैं, इसलिए हम एहतियातन ऐसा कदम उठा रहे हैं। शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन होगा लेकिन जनता को असुविधा होना ठीक नहीं है। हर रोज हजारों वाहन दिल्ली की तरफ बढ़ रहे हैं, पर दिल्ली की सीमाएं इस तरह से सील कर दी गई हैं कि किसानों की एंट्री मुश्किल है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां बार-बार यही कह रही हैं कि एहतियात बरतना होगा। अब चूंकि आंदोलन में राजनीति शुरू हो गई है तो हो सकता है राजनीतिक तरीके से ही इसका समाधान निकले।  

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