नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा संसद में लाए गए विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill 2026) को लेकर विपक्षी खेमे ('INDIA' गठबंधन) में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। जहां एक ओर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस विधेयक को पूरी तरह से वापस (Scrap) लेने की मांग पर अड़ी हुई है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रमुक (DMK), बीजू जनता दल (BJD) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) जैसे दल इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास जांच के लिए भेजने की सिफारिश कर रहे हैं।
विपक्ष के बंटे रुख के बीच केंद्र सरकार भी गतिरोध समाप्त करने और आम सहमति बनाने के लिए विधेयक को जेपीसी (JPC) के हवाले करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है।
विपक्षी दलों का अलग-अलग रुख: किसने क्या कहा?
- कांग्रेस (Congress):
- कांग्रेस का रुख FCRA बिल को लेकर सबसे कड़ा है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि सरकार इस विधेयक को तुरंत वापस ले। कांग्रेस का आरोप है कि यह कानून गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और कल्याणकारी संस्थाओं को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है।
- तृणमूल कांग्रेस (TMC):
- राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में तृणमूल कांग्रेस के फ्लोर लीडर डेरेक ओ'ब्रायन ने पहले इस बिल को समीक्षा के लिए जेपीसी (JPC) में भेजने का प्रस्ताव रखा था, हालांकि बाद में पार्टी ने इसे वापस लेने की मांग भी उठाई।
- द्रमुक (DMK):
- डीएमके का स्टैंड है कि सरकार या तो इस विधेयक को पूरी तरह वापस ले या विस्तृत विचार-विमर्श के लिए इसे जेपीसी के सुपुर्द करे।
- बीजू जनता दल (BJD) एवं NCP (SP):
- बीजेडी ने विधेयक को जेपीसी में भेजने की वकालत की है।
- वहीं NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि विदेशी फंडिंग को हर बार संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि यदि बिल वापस नहीं लिया जाता, तो इसे जेपीसी के पास भेजा जाना चाहिए।
क्या है FCRA संशोधन विधेयक 2026 और विवाद का कारण?
- 25 मार्च 2026 को पेश हुआ था बिल: यह विधेयक पहली बार 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के विरोध के कारण इस पर चर्चा टलती रही।
- 'नामित प्राधिकरण' (Designated Authority) का गठन: प्रस्तावित संशोधन के तहत, यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द होता है, समाप्त होता है या उसका नवीनीकरण नहीं होता है, तो विदेशी योगदान से निर्मित परिसंपत्तियों (Assets) के प्रबंधन, देखरेख और जब्ती के लिए एक विशेष 'नामित प्राधिकरण' की व्यवस्था की जाएगी।
- विपक्ष की मुख्य आपत्ति: विरोध कर रहे दलों और सिविल सोसाइटी का कहना है कि बिना न्यायिक समीक्षा के संपत्ति जब्त करने का अधिकार सरकारी तंत्र के अत्यधिक हस्तक्षेप और मनमानी को बढ़ावा देगा।
सरकार की रणनीति: JPC के रास्ते सहमति बनाने की कोशिश
सोमवार को आयोजित बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में इस विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को संसद के तात्कालिक एजेंडे में शामिल नहीं किया गया था।
विपक्षी दलों के बीच एकराय न होने का लाभ उठाते हुए, सरकार अब बीच का रास्ता निकालने की तैयारी में है। यदि विपक्षी दल जेपीसी पर राजी होते हैं, तो सरकार इस बिल को संसदीय समिति के पास भेजकर मानसून सत्र के दौरान जारी गतिरोध को टाल सकती है।
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