कोल ब्लॉक आवंटन मामले में मनमोहन सिंह को क्लीन चिट के बाद सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर हमला: "इतिहास उन्हें सम्मान से याद रखेगा"

Rahul Jadaun 11 Aug 2026 05:17: PM 3 Mins
कोल ब्लॉक आवंटन मामले में मनमोहन सिंह को क्लीन चिट के बाद सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर हमला:

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2005 के तालाबीरा-II (ओडिशा) कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बेदाग बरी किए जाने और क्रिमिनल केस बंद करने के फैसले के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित अपने एक लेख के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा राजनीतिक और नैतिक हमला बोला है।

सोनिया गांधी ने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सार्वजनिक विमर्श के सबसे दुखद अध्यायों में से एक पर पूर्ण विराम लगाता है। उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह की ईमानदारी और पारदर्शिता का रिकॉर्ड मौजूदा सरकार की कार्यशैली से बिल्कुल अलग और विपरीत था।

सोनिया गांधी के लेख के 5 मुख्य बिंदु

  1. "सुनियोजित षड्यंत्र का अंत हुआ शून्य पर"

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि UPA कार्यकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ एक संगठित और सुनियोजित अभियान चलाया गया था। इसमें नौकरशाही, मीडिया, न्यायपालिका का एक वर्ग, सिविल सोसाइटी तथा RSS और BJP से जुड़े लोग शामिल थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि वह पूरा अभियान केवल राजनीतिक छवि खराब करने की नीयत से रचा गया था और अब उसका अंत शून्य पर हुआ है।

  1. पीएम मोदी के 2017 वाले 'रेनकोट' बयान का जिक्र

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 फरवरी 2017 को राज्यसभा में दिए गए उस भाषण का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि "डॉ. मनमोहन सिंह को रेनकोट पहनकर नहाने की कला आती है।"

सोनिया ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इन दिनों छात्रों को माफ करने की बात कर रहे हैं, तो उन्हें पूर्व पीएम के खिलाफ की गई अपनी गरिमाहीन टिप्पणी के लिए खुद को भी माफ कर आत्मचिंतन करना चाहिए।

  1. ED और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार की जांच करने वाली स्वायत्त एजेंसियों (ED और CBI) को राजनीतिक हथियार बना दिया है। विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने, उन्हें चुप कराने या राजनीतिक लाभ के लिए अपनी ओर मिलाने की नीयत से इन तंत्रों का प्रयोग किया जा रहा है।

  1. UPA सरकार की आर्थिक उपलब्धियां और जनकल्याणकारी नीतियां

सोनिया गांधी ने डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल की उपलब्धियों को याद दिलाते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश में व्यापक आर्थिक बदलाव हुआ, निजी निवेश बढ़ा और लाखों लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले। उन्होंने 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट में भारत के संभले रहने का उदाहरण दिया और साथ ही:

  • शिक्षा का अधिकार कानून (RTE)
  • IIT और IIM में OBC आरक्षण
  • मनरेगा (MGNREGA)
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (2013)
  • वन अधिकार कानून जैसे ऐतिहासिक कदमों को रेखांकित किया।
  1. "तब छात्रों पर पेलेट गन नहीं चला करती थीं"

लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के समय में सिविल सोसाइटी और छात्रों को सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाने की पूरी स्वतंत्रता थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में प्रदर्शनकारी युवाओं पर मेटल पेलेट गन या गोलियां नहीं चलाई जाती थीं और प्रधानमंत्री खुद बिना किसी स्क्रिप्ट की दर्जनों प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संसद और देश के प्रति जवाबदेह रहते थे।

क्या था तालाबीरा-II कोल ब्लॉक मामला?

  • 2005 का मामला: ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक का आवंटन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ हिंदाल्को इंडस्ट्रीज को किया गया था।
  • CBI की क्लोजर रिपोर्ट: CBI ने अपनी जांच के बाद 2014 में ही ट्रायल कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट जमा की थी कि डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है।
  • ट्रायल कोर्ट का आदेश और समन: हालांकि, 2015 में विशेष सीबीआई अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर मनमोहन सिंह को समन जारी कर दिया था, जिसे डॉ. सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
  • सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के समन को पूरी तरह रद्द करते हुए CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर अपनी मुहर लगाई और मामले को मेरिट के आधार पर बंद कर दिया।
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