| • पुलिस ने मारा गोदाम में छापा, कागज मांगा तो मजदूर बोले बीजेपी नेता के भाई की है फैक्ट्री, योगी तक पहुंची बात,फिर कैसे हुई FIR • योगी से मुलाकात की तस्वीर भी आई, पर मुलायम-अखिलेश राज की तरह न दारोगा को फोन आया, न एसपी, को ऐसे पलट गया गेम! |

...ये तस्वीर है बीजेपी नेता राजेश सिंघल और उनके भाई कपिल सिंघल की, दोनों योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने 13 अप्रैल को लखनऊ पहुंचते हैं, लेकिन 5 दिन बाद ही भाजपा नेता के भाई की फैक्ट्री पर पुलिस पहुंच जाती है, और वहां जो दिखता है, उसके बाद संभल जिले के कैलादेवी थाना क्षेत्र के इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह तुरंत मुकदमा दर्ज करते हैं, क्योंकि फैक्ट्री मालिक न तो कोई कागज दिखाते पाते हैं, और ना ही इसका कोई सही जवाब दे पाते हैं, ये चीजें आईं कहां से.
दरअसल कुछ समय से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रहीं थीं कि रझेड़ा सलेमपुर गांव की कबाड़ फैक्ट्री में बड़ा खेल चल रहा है, कोई कुछ बोलता इसलिए नहीं क्योंकि बीजेपी नेता के भाई की फैक्ट्री है, लेकिन जब पुलिस ने एक्शन लिया तो कबाड़ फैक्ट्री की तस्वीरें भी आईं और ये भी संदेश गया कि योगीराज में आरोपी चाहे बीजेपी नेता हो या कोई रसूखदार कार्रवाई सब पर एक होगी.
तस्वीरों में आप साफ देख सकते हैं कि वहां कई गाड़ियों का कबाड़ पड़ा है, पुलिस का दावा है ये गाड़ियां चोरी की हैं, संभल के एसपी केके बिश्नोई ने साफ कहा है जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. चोरी की फॉर्च्यूनर गाड़ी के पार्ट्स यहां अलग-अलग किए जाने को लेकर हरियाणा पुलिस भी कुछ वक्त पहले पहुंची थी, जिसके बाद सवाल ये उठने लगे कि क्या मेरठ के बाद अब संभल में भी चोरी की गाड़ियों को कबाड़ में बेचे जाने और फिर उसे बदलने का खेल चल रहा है. हालांकि बीजेपी नेता के भाई इन आरोपों को नकार रहे हैं.
उनका दावा है कि फैक्ट्री और जमीन मेरे नाम पर नहीं है, ये बीते 5-6 महीने से बंद है. कहा जा रहा है फैक्ट्री का रजिस्ट्रेशन कपिल के बेटे के नाम पर है, लेकिन रसूख इस बात का है कि कपिल के बड़े भाई राजेश सिंघल भाजपा पश्चिम के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष और संभल के पूर्व जिलाध्यक्ष रहे हैं. राजेश सिंघल ने 2007, 2012 और 2022 में भाजपा टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा है. यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ से जब वो मुलाकात के लिए पहुंचे तो कइयों ने ये कयास लगाना शुरू कर दिया कि संभल में अब फिर कुछ बड़ा होने वाला है, लेकिन किसी को ये उम्मीद नहीं थी कि आज मुलाकात और 5 दिन बाद भाई की फैक्ट्री पर ही छापा पड़ जाएगा.
अगर सपा या बसपा की प्रदेश में सरकार होती तो क्या ऐसा हो सकता था कि किसी पार्टी नेता के परिवार का नाम किसी केस में आए और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो जाए या फिर मुकदमा हो भी जाता तो उस अधिकारी की क्या हालत होती पुराने पन्ने पलटकर अंदाजा लगा सकते हैं, ऐसे में इस एक्शन को आप कैसे देखते हैं, अपनी राय जरूर दें. ये एक तरह का संदेश है कि गलती करने वाला कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा.