नालंदा विश्वविद्यालय में प्राचीन महाकाव्यों से आधुनिक कूटनीति सीख रहे विदेशी छात्र

Amanat Ansari 26 May 2026 09:04: PM 2 Mins
नालंदा विश्वविद्यालय में प्राचीन महाकाव्यों से आधुनिक कूटनीति सीख रहे विदेशी छात्र

Ramayana and Mahabharata Study in Nalanda University: बिहार की ज्ञान-भूमि एक बार फिर चर्चा में है. नालंदा विश्वविद्यालय में रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों से अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के सबक लिए जा रहे हैं. यहां विदेशी छात्र इन महाकाव्यों के जरिए आज की जटिल वैश्विक चुनौतियों का विश्लेषण कर रहे हैं. होर्मुज स्ट्रेट का संकट हो या फिर अमेरिका, चीन और रूस के साथ भारत के रणनीतिक संबंध, ये सब मुद्दे अब नालंदा के क्लासरूम में राम और कृष्ण के दृष्टिकोण से समझे जा रहे हैं.

नालंदा विश्वविद्यालय का पोस्टग्रेजुएट कोर्स International Relations and Peace Studies (IRPS) इस दिशा में अनोखा प्रयास है. दुनिया के 30 से अधिक देशों के छात्र यहां पढ़ रहे हैं. यह कोर्स भारतीय महाकाव्यों और प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक कूटनीति, शांति अध्ययन और रणनीतिक विश्लेषण से जोड़ता है.

कुलपति सचिन चतुर्वेदी के अनुसार, विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्राचीन भारतीय परंपराओं को पुनर्जीवित करना और उन्हें वर्तमान वैश्विक समस्याओं से जोड़कर सार्थक चर्चा करना है. हाल के दिनों में कई छात्रों के शोध-पत्रों में भारतीय ज्ञान प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय संबंधों, नैतिकता, शासन और रणनीति के संदर्भ में खोजा गया है. ESG सिद्धांतों और अर्थशास्त्र जैसी अवधारणाओं पर भी भारतीय सभ्यता के नजरिए से विचार किया जा रहा है.

छात्रों के शोध से कुछ उदाहरण...

मास्टर छात्रा सुरभि रानी ने अपने शोध में रामायण के किष्किंधा कांड का हवाला देते हुए भारत की रणनीतिक साझेदारियों का विश्लेषण किया. उन्होंने राम-सुग्रीव गठबंधन को मित्र-धर्म, विश्वास और राजधर्म पर आधारित असमान लेकिन नैतिक साझेदारी का उदाहरण बताया. यह मॉडल बिना प्रभुत्व वाले प्रभाव और जिम्मेदारीपूर्ण नेतृत्व का प्रतीक है.

एक अन्य शोधकर्ता प्रीति कुमारी ने महाभारत में भगवान कृष्ण द्वारा सॉफ्ट पावर के उपयोग पर प्रकाश डाला. उन्होंने कृष्ण के निर्णयों को आधुनिक ‘Just War’ सिद्धांत और ‘Supreme Emergency’ की अवधारणा से जोड़ा. खासतौर पर कर्ण वाले प्रसंग का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे नियमों का उल्लंघन करने वालों को सुरक्षा नहीं दी जा सकती.

नालंदा विश्वविद्यालय अब ‘शास्त्रार्थ’ की परंपरा को और अधिक व्यवस्थित रूप से पढ़ाई में शामिल करने की तैयारी कर रहा है. कुलपति चतुर्वेदी कहते हैं कि पश्चिमी बहसें अक्सर जीत-हार पर केंद्रित रहती हैं, जबकि भारतीय ज्ञान परंपरा संचित ज्ञान और गहन समझ पर टिकी है. रामायण, महाभारत और अन्य भारतीय ग्रंथों से प्रेरणा लेकर विश्वविद्यालय संघर्ष, शांति और वैश्विक व्यवस्था को समझने का भारतीय नजरिया दुनिया के सामने रख रहा है. यह पहल न सिर्फ नालंदा की प्राचीन विरासत को नई ऊर्जा दे रही है, बल्कि भारतीय सभ्यतागत मूल्यों को वैश्विक कूटनीति के मैदान में प्रासंगिक बना रही है.

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