पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की जेल में ऐसे कटी रात, बेचैनी में बदलते रहे करवट

Amanat Ansari 19 Dec 2025 09:53: PM 2 Mins
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की जेल में ऐसे कटी रात, बेचैनी में बदलते रहे करवट

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर, जिन्हें 'यूपी का खेमका' भी कहा जाता है, को कोडीन आधारित कफ सिरप की अवैध तस्करी से जुड़े आरोपों में झूठा दावा करने की एफआईआर के मामले में बी-वारंट पर देवरिया जेल से वाराणसी लाया गया. शुक्रवार को विशेष सीजेएम कोर्ट में उनकी पेशी हुई, जहां भारी पुलिस बल तैनात था. हिंदू संगठनों से संभावित विरोध को देखते हुए कोर्ट परिसर में सैकड़ों पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ जैकेट में मौजूद रहे.

गुरुवार शाम को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें वाराणसी सेंट्रल जेल पहुंचाया गया. जेल अधिकारियों ने उन्हें अलग-थलग बैरक में रखा, जहां दूसरे कैदियों से कोई संपर्क नहीं होता और बाहर अतिरिक्त गार्ड तैनात किए गए. सूत्रों के मुताबिक, रात में वे काफी बेचैन रहे, बार-बार करवट बदलते रहे और नींद नहीं आ सकी. उन्हें सिर्फ दो कंबल ही उपलब्ध कराए गए, जबकि कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं दी गई, जैसा कि जेल नियमों में है.

यह मामला हिंदू युवा वाहिनी के नेता और वाराणसी विकास प्राधिकरण के सदस्य अंबरीश सिंह 'भोला' की शिकायत पर आधारित है. 8 दिसंबर को चौक थाने में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक पत्र और वीडियो शेयर किए, जिसमें भोला पर कफ सिरप तस्करी में शामिल होने का गलत आरोप लगाया गया, जिससे उनकी छवि खराब हुई.

ठाकुर ने इससे पहले डीजीपी सहित अधिकारियों को पत्र लिखकर भोला की भूमिका की जांच की मांग की थी. उन्होंने दो वीडियो भी साझा किए थे. एक में भोला के घर से सामान हटाए जाने का दावा और दूसरे में उनके काफिले को दिखाया गया. उनका कहना था कि तस्करी के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल ने भोला को बड़ी रकम दी थी.

कोर्ट में पेशी के दौरान ठाकुर चुपचाप खड़े रहे. उनके वकील अनुज यादव ने तर्क दिया कि एफआईआर की धाराएं गैर-जमानती नहीं हैं. कुछ असंज्ञेय हैं और बाकी में सजा अधिकतम सात साल की हो सकती है, इसलिए रिमांड नहीं बनती. सरकारी पक्ष से भी बहस हुई. सुनवाई के बाद उन्हें वापस देवरिया जेल भेजने का आदेश हुआ. पुलिस अधिकारी ने कहा कि नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है और सुरक्षा के पूरे बंदोबस्त हैं.

अमिताभ ठाकुर की 29 साल की सेवा में 31 बार ट्रांसफर हुए थे, जो उनके विवादास्पद करियर को दर्शाता है. यह मामला कोडीन सिरप तस्करी के बड़े सिंडिकेट से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें ठाकुर पर्दाफाश की कोशिश कर रहे थे.

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