नई दिल्ली: सरकार के शीर्ष सूत्रों ने यह जानकारी दी है कि ईंधन और LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है. सरकार वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है.
पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग Rs 4-5 प्रति लीटर बढ़ाई जा सकती हैं, जबकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में करीब Rs 40–50 की बढ़ोतरी हो सकती है. अगर मंजूर हो जाता है, तो यह लगभग चार साल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहली बढ़ोतरी होगी. खुदरा दरें 2022 से लगभग स्थिर (फ्रोजन) रखी गई हैं.
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की मजबूत संभावना है, क्योंकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर दबाव बढ़ रहा है. हालांकि, सरकार ने हाल ही में विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के तुरंत बाद कीमत बढ़ाने की संभावना से इनकार किया था. इस बढ़ोतरी का कारण खाड़ी में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि है.
आपूर्ति में संभावित व्यवधान, शिपिंग जोखिम और लंबे समय तक अस्थिरता की चिंताओं ने हाल के हफ्तों में बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के इनपुट लागत में वृद्धि हुई है. खुदरा ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ने के कारण ऑयल कंपनियां घाटा उठा रही हैं, जिससे अंडर-रिकवरी हो रही है. ऊंची कच्चे तेल की कीमतें सरकार पर राजकोषीय बोझ भी बढ़ा रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को सब्सिडी या टैक्स कट के जरिए राहत देने की गुंजाइश सीमित हो रही है.
5-7 दिनों में कीमत बढ़ोतरी का फैसला
सूत्रों ने बताया कि सरकार पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति और उसके वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर प्रभाव पर नजर रखे हुए है. हालांकि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन संभावित कीमत बढ़ोतरी पर फैसला अगले 5–7 दिनों में लिया जा सकता है. अंदरूनी चर्चाएं चल रही हैं, जिसमें बढ़ोतरी के समय और उसके स्तर समेत कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.
अधिकारियों ने कहा कि सरकार ऑयल कंपनियों पर वित्तीय दबाव को दूर करने और यह सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. ईंधन और LPG की कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी परिवारों के बजट और परिवहन लागत पर व्यापक असर डालेगी, इसलिए वैश्विक अनिश्चितता के इस समय में यह एक संवेदनशील नीतिगत फैसला है.