बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के बाद गौतम गंभीर की छुट्टी तय, BCCI लेगा जबरदस्त एक्शन !

Global Bharat 03 Jan 2025 06:40: PM 4 Mins
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के बाद गौतम गंभीर की छुट्टी तय, BCCI लेगा जबरदस्त एक्शन !

भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास में शायद ही कोई कोच हो, जिसने 5 महीने के अंदर टीम की लुटिया पूरी तरह से डुबा दी हो. लेकिन गंभीर ने ये करतब करके दिखाया है, उन्हें जल्दी ही BCCI इसका बड़ा इनाम भी देने जा रही है. चर्चा है कि बोर्ड ने दूसरे कोच की तलाश शुरू कर दी है. खबर तो ये भी है कि BCCI शुरूआत से ही गंभीर को हेड कोच बनाने के पक्ष में नहीं था. बल्कि उसकी लिस्ट में सबसे पहला नाम भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के मौजूदा प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण का था. पर मजबूरी में गंभीर पर दांव लगाना पड़ा, जिसका खामियाजा आज टीम भुगत रही है.हालिया मैचों के लिए गौतम के कोचिंग पर गंभीर सवाल खड़े हैं. 

5 महीने में टीम इंडिया का प्रदर्शन

सबसे पहले श्रीलंका से भारत को वनडे सीरीज में ऐतिहासिक शिकस्त झेलनी पड़ी. इसके बाद न्यूजीलैंड से घरेलू टेस्ट सीरीज में 3-शून्य की हार ने और बेइज्जती करवाई. अब बार्डर गावस्कर ट्रॉफी में भी ऑस्ट्रेलिया के सामने टीम ने जैसे घुटने टेके हैं. वो देखकर गंभीर का क्लीन बोल्ड होना तय है. हालांकि गंभीर के पास करो या मरो की स्थिति में एक आखिरी मौका बचा है, और वो है चैंपियंस ट्रॉफी. पर यहां सवाल ये है कि आखिर टीम की इस दुर्दशा के लिए क्या सिर्फ गंभीर दोषी हैं. 
बताया ये जा रहा है कि टीम के खिलाड़ियों और गौतम गंभीर के बीच वो बॉन्डिंग नहीं बन पा रही, जो एक वक्त राहुल द्रविड़ और रवि शास्त्री के साथ हुआ करती थी. यहीं वजह है कि पर्थ में भारत की अप्रत्याशित जीत के बाद कुछ ऐसा देखा गया, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. आम तौर पर जीत का जश्न पूरी टीम एक साथ मनाती है, पर उस रात टीम के खिलाड़ियों ने अलग-अलग ग्रुप्स में बंटकर जश्न मनाया. हेड कोच गौतम गंभीर जहां अपने परिवार के साथ रेस्त्रां में डिनर का लुत्फ उठाते देखे गए. तो वहीं बाकी खिलाड़ी पर्थ में सड़कों पर अलग-अलग ग्रुप में जश्न मनाते दिखे.

रिपोर्ट्स के मुताबिक टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ के एक सीनियर मेंबर ने खिलाड़ियों के बिल पेमेंट के लिए अपने क्रेडिट कार्ड की पेशकश भी की थी, जिसे प्लेयर्स ने ठुकरा दिया. टीम के बीच अनबन की खबरों को हवा इसलिए भी मिल रही है, क्योंकि जिस तरह से सिडनी टेस्ट में कप्तान रोहित शर्मा को बाहर किया गया है, वो भी सवालों के घेरे में है. कहा जा रहा है कि रोहित खेलना चाहते थे, पर गंभीर ने उन्हें रोक दिया. पर क्या सच में ऐसा ही था. 

सिडनी टेस्ट से रोहित बाहर 

शुक्रवार सुबह जसप्रीत बुमराह जब टॉस के लिए मैदान पर आए तो उन्होंने कहा- हमारे कप्तान ने टेस्ट से आराम लिया है. बुमराह के इन शब्दों से लगता है कि टीम इंडिया में सब कुछ ठीक चल रहा. क्योंकि रोहित शर्मा को अगर ड्रॉप नहीं किया गया और वो अपनी मर्जी से बाहर बैठे. तो फिर पिछले दिनों ड्रेसिंग रूम में क्या चल रहा था?. गौतम गंभीर ने सिडनी टेस्ट से एक दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि ड्रेसिंग रूम की बहस सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए. यानी मेलबर्न में हार के बाद भारतीय टीम जब सीरीज में 1-2 से पिछड़ गई तो अंदर का माहौल बेहद गर्म था. और अब कप्तान ही टीम से बाहर हो गए. हालांकि इसके पीछे वजह उनका प्रदर्शन भी है, जिसकी चर्चा पहले तो ड्रेसिंग रुम तक ही थी, लेकिन अब हर कोई कर रहा है. इस सीरीज में रोहित शर्मा ने तीन मैचों में 6.20 की औसत से केवल 31 रन बनाए हैं. उनकी खराब फॉर्म का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक बार भी 10 रन का आंकड़ा पार नहीं किया. रोहित शर्मा का बैटिंग परफॉर्मेंस पिछले 8 मैचों में देखा जाए तो उन्होंने 15 पारियों में केवल 10.93 की औसत से 164 रन ही बनाए हैं. अब जब कप्तानी ही ढीली पड़ जाए तो दूसरों को क्या ही दोष देना. दूसरी तरफ, रन मशीन कहे जाने वाले विराट कोहली का हाल भी अच्छा तो बिल्कुल नहीं है. विराट ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की 8 पारियों में 184 रन ही बनाए हैं. 

जबकि इन दोनों से अच्छा प्रदर्शन यशस्वी जायसवाल का रहा है, जिन्होंने 9 पारियों में 46.12 की औसत से 369 रन बनाए. नितीश कुमार रेड्डी, जिन्होंने 8 पारियों में 42 की औसत से 294 रन बनाए हैं. एक कहावत है, नाम बड़े दर्शन छोटे. कुछ ऐसा ही हाल कोहली और रोहित का हो चुका है. इनका बल्ला सिर्फ IPL में चलता है, जहां चौकों-छक्कों के साथ पैसों की बरसात होती है. टीम इंडिया की जर्सी पहनते ही इनके हाथ-पांव ठंडे पड़ जाते हैं. हालांकि बल्ला शांत है रोहित और कोहली का. पर गाज गिरेगी गंभीर पर. क्योंकि टीम की जिम्मेदारी उन पर है. दो खिलाड़ी अच्छा नहीं खेलेंगे तो क्या टीम हारती रहेगी, ये सवाल जायज है. और एक दिन या एक मैच की बात नहीं है. 

5 महीनों से हार के तमंगे टीम इंडिया के कंधों पर लटकते चले जा रहे हैं. सियासी मैदान में अटल जी कहा करते थे कि सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, मगर ये देश रहना चाहिए. वैसे ही कप्तान आएंगे-जाएंगे, ड्रेसिंग रुम में रिश्ते बनेंगे-बिगड़ेंगे पर टीम इंडिया हमेशा जीतनी चाहिए. कहा जाता है कि खेल को खेल की भावना से ही लिया जाना चाहिए, पर सवाल ये है कि कब तक. फिलहाल देखना दिलचस्प रहेगा कि BCCI गौतम गंभीर को लेकर क्या फैसला लेती है. क्या गंभीर की जगह वीवीएस लक्ष्मण को हेड कोच के तौर पर टीम की कमान सौंपी जाएगी. या फिर गौतम गंभीर को सिर्फ टेस्ट टीम की कोचिंग से हटाया जाएगा और वो लिमिटेड ओवर फॉर्मेट में टीम के साथ बने रहेंगे.

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