पंचर बनाने वाले के बेटे ने कैसे पास की UPSC की परीक्षा? पढ़ें प्रेरणा देने वाली स्टोरी

Abhishek Chaturvedi 23 Apr 2025 04:28: PM 2 Mins
पंचर बनाने वाले के बेटे ने कैसे पास की UPSC की परीक्षा? पढ़ें प्रेरणा देने वाली स्टोरी
  • पिता बनाते थे पंक्चर, लोगों को कहते बेटा बनेगा IAS, तो अपने ही हंसते थे, रिजल्ट आते ही हंसने वालों के उड़े होश!
  • कौन हैं इकबाल, जिन्हें पिता की गरीबी पर रोना आया, मां की मायूसी पर साधे रहे चुप्पी, भाई करते हैं पेंटर का काम!
  • संतकबीरनगर जिले में घर, बस्ती जिले में अधिकारी की कुर्सी, फिर भी IAS का सपना नहीं छोड़ा, दादा से जुड़ा है किस्सा!

नई दिल्ली: देश में इन दिनों एक बहस चल रही है कि हर मुसलमान पंचरवाला नहीं होता, कुछ मीडिया वाले मुस्लिम पंचर की दुकान पर जा रहे तो कुछ मीडिया वाले हिंदू पंचर वालों को ढूंढ रहे हैं, लेकिन इसी बहस के बीच एक पंचरवाले के बेटे ने ऐसा झंडा गाड़ा कि पूरा देश कहेगा लाल हो तो ऐसा. इकबाल ने कमाल कर दिया.

ये हैं संतकबीरनगर जिले के फतेहपुर गांव के रहने वाले इकबाल अहमद, पिता मकबूल अहमद पंचर की दुकान चलाते हैं, एसबीआई की ब्रांच नंदौर के पास ही इनकी दुकान थी, दिन भर लोगों का आना-जाना लगा रहता था, पर कमाई उतनी ही हो पाती थी, जितने में किसी तरह रोजी-रोटी चल पाए, इकबाल तीन भाई और 2 बहनें हैं, इसलिए बचपन से ही इस बात का दबाव था कि कुछ बड़ा करना होगा, पर साधन नहीं थे, इसलिए बाहर जाकर पढ़ाई करना मुश्किल था, मेंहदावल से ही इंटर की डिग्री ली, उसके बाद किसी तरह व्यवस्था बनाकर गोरखपुर और इलाहाबाद से आगे की पढ़ाई की.

चूंकि इकबाल पढ़ने में तेजतर्रार हैं, इसलिए घरवालों को भी भरोसा था एक न एक दिन कुछ करेगा. और वो उम्मीद तब पूरा हो गया, जब कुछ साल पहले इनका चयन PCS अधिकारी के रूप में हुआ, बांदा में श्रम प्रवर्तन अधिकारी के रूप में तैनाती मिली. घरवालों को लगा अब तैयारी छोड़ देगा, पर इकबाल के मन में पिता की कही हुई वो बात घूम रही थी कि तुम्हारे दादाजी मुझे अधिकारी बनाना चाहते थे, मैं नहीं बन पाया, इसलिए तुम IAS बन जाओ.

इकबाल ने नौकरी के साथ ही तैयारी जारी रखी और साल 2024 में हुई UPSC परीक्षा का रिजल्ट जैसे ही 22 अप्रैल 2025 को जारी हुआ, इकबाल का नाम 998वीं रैंक पर था, जिसे सुनते ही पिता मिठाईय़ां बांटने लगते हैं, और कहते हैं, ''मेरी दुकान तो दो साल से बंद है, पर बेटे ने गरीबी देखी और दिन-रात मेहनत करता रहा. मेरे मां-बाप मुझे ऑफिसर बनाना चाहते थे, लेकिन गरीबी की वजह से मैं नहीं पढ़ सका, उन्होंने आखिरी वक्त में कहा था बेटे को IAS बनाना, अब बड़ा अच्छा लग रहा है.''

इकबाल की मां कहती हैं कि मेरा बच्चा पास हो गया, मैं बहुत खुश हूं. इकबाल के एक भाई पेंटर हैं, वो भी अपने भाई की इस सफलता पर खुश हैं, पर जानकार कहते हैं कि इस बार भी इकबाल अहमद को IAS की कुर्सी मिलना मुश्किल है, क्योंकि रैंक और ऊपर होती तो IAS मिल पाता. इस बार यूपीएसएसी की परीक्षा में यूपी के लड़के-लड़कियों का जलवा देखने को मिला है. प्रयागराज की शक्तिदूबे ने जहां टॉप किया है तो वहीं संभल में चाय की दुकान चलाने वाले इंद्रमोहन के बेटे देव ने भी यूपीएसएसी पास कर घरवालों का सपना पूरी किया है.

मिर्जापुर से 4, बदायूं से 3, जबकि हमीरपुर से दो लोगों को सफलता मिली है. सहारनपुर की कोमल ने तो छठी रैंक हासिल की है. सीतापुर के उत्कर्ष को 850वीं तो वहीं लखनऊ की कुमुद को 69वीं रैंक मिली है. इनके अलावा यूपी के अलग-अलग जिलों से कई अभ्यर्थियों का चयन हुआ है. जिन्हें बधाई देने के साथ ही ये कहानी आप उन लोगों तक जरूर पहुंचाएं, जो परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, ताकि उनका हौसला बढ़े और दोगुनी जोश से मेहनत कर सफलता हासिल करें.

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