पटना: बिहार में जन सुराज का सपना टूटा तो प्रशांत किशोर टूट गए. पहली बार उन्होंने खुलकर माना कि नतीजों के बाद से न ठीक से नींद आ रही है, न दिल को सुकून. उन्होंने कहा कि ये मेरे लिए बहुत बड़ा झटका है. एक टीवी इंटरव्यू में PK ने साफ-साफ हार की जिम्मेदारी अपने सिर ले ली. बोले, ''मैंने कोई सर्वे नहीं करवाया था. अंदाजा लगाया था कि 12-15% वोट तो आएंगे ही. हुआ सिर्फ 3.5-4%. ये फर्क छोटा नहीं है. मैंने ब्लाइंड खेला और हार गया. अब बैठकर समझना पड़ेगा कि कहां चूक हुई.''
उन्होंने बताया कि बिहार में चार तरह के वोटर हैं...
जन सुराज ने पहले दो ग्रुप को थोड़ा हिलाया, बाकी दो तक पहुंच ही नहीं पाए. पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा जैसे मुद्दे तो उठाए, लेकिन वोट की भाषा में ट्रांसलेट नहीं हो सके. फिर भी PK ने हिम्मत नहीं हारी. बोले, ''हार मान ली तो हार गए. अभी तो हारा नहीं हू. भाजपा के पास भी कभी दो सांसद थे. नई पार्टी बनाने का यही दाम है. हमने जाति-धर्म का जहर नहीं फैलाया, इसलिए मुझे अफसोस नहीं है. अफसोस सिर्फ इतना है कि हमारी टाइमलाइन गलत साबित हुई.''
जेडीयू की 85 सीटों पर उन्होंने फिर अपनी पुरानी भविष्यवाणी दोहराई. उन्होंने कहा, ''मेरा अभी भी मानना है कि बिना पैसे और सरकारी मशीनरी के जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें नहीं मिलनी चाहिए थीं. लेकिन 1.2 करोड़ महिलाओं के खाते में 10-10 हजार डाल दिए, हर सीट पर 100-125 करोड़ बांट दिए, जिससे खेल पलट गया.''
अंत में प्रशांत किशोर ने जो कहा, वो लाइन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. उन्होंने कहा, ''मैं अभी रुका नहीं हूं. ये दस साल का प्रोजेक्ट है, साढ़े तीन साल निकल गए. सात साल और हैं. कोशिश जारी रहेगी. हार गया हूं, मरा नहीं हूं.'' कह सकते हैं कि जन सुराज का पहला इंनिंग तो आउट हो गया, लेकिन प्रशांत किशोर अभी क्रीज पर डटे हैं. अगली पारी का इंतजार है.