नई दिल्ली: बांग्लादेश के हालिया संसदीय चुनाव पर नजर डालें तो यह चुनाव फरवरी 2026 में हुए, जिसमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल किया और तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई. आवामी लीग इस बार चुनाव से बाहर रही और अल्पसंख्यक समुदायों खासकर हिंदुओं पर हमलों की खबरों के बीच यह चुनाव काफी चर्चा में रहा. BNP ने जहां 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिया, वहीं जमात ने एक सीट पर हिंदू समुदाय के व्यक्ति को मैदान में उतारा. कुल मिलाकर देखा जाए तो संसद में गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत बहुत सीमित रही.
BNP के जीतने वाले हिंदू उम्मीदवार
गयेश्वर चंद्र रॉय (Gayeshwar Chandra Roy) ढाका-3 सीट से जीते. उन्होंने 99,163 वोट हासिल किए, जबकि जमात-ए-इस्लामी के शाहीनुर इस्लाम को 83,264 (या कुछ रिपोर्ट्स में 82,232) वोट मिले. यह सीट पहले आवामी लीग के पास थी. गयेश्वर रॉय एक वरिष्ठ BNP नेता हैं और ढाका से हिंदू सांसद बनने का यह लंबे समय बाद का मामला माना जा रहा है.
निताई रॉय चौधरी (Nitai Roy Chowdhury) मागुरा-2 सीट से जीते (कुछ जगहों पर मागुरा-3 लिखा गया, लेकिन सही मागुरा-2 है). उन्हें 1,47,896 वोट मिले, जबकि जमात के मोहम्मद मुश्तरशेद बिल्लाह को 1,17,018 वोट मिले. निताई रॉय भी BNP के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं और अल्पसंख्यक चेहरे के रूप में जाने जाते हैं.
कुछ रिपोर्ट्स में तीन हिंदू उम्मीदवारों की जीत का जिक्र है, लेकिन ज्यादातर विश्वसनीय स्रोतों में दो ही पुष्टि हुई है (ढाका-3 और मागुरा-2). तीसरे का स्पष्ट नाम नहीं मिला, संभवतः कोई अन्य या अपडेट में बदलाव.
अन्य अल्पसंख्यक उम्मीदवार
कृष्णा नंदी (Krishna Nandi) जमात-ए-इस्लामी के टिकट पर खुलना-1 से लड़े, लेकिन BNP के अमीर एजाज खान से हार गए (BNP को करीब 1.21 लाख वोट, नंदी को 70 हजार के आसपास). रंगमती से दीपेन दीवान (BNP) से 2 लाख+ वोटों से जीते.
बंदरबान से साचिंग प्रू (BNP) से ही 1.41 लाख वोटों से जीते.
बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगभग 7-8% है (करीब 1.5 करोड़), जो आजादी के समय 22% से घटकर अब इतनी रह गई है. BNP की जीत के साथ अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि संसद में हिंदू सांसदों की संख्या बहुत कम है. हिंदू उम्मीदवारों की सफलता मुख्य रूप से BNP के साथ जुड़ी रही, जबकि अन्य दलों में उनका प्रदर्शन कमजोर रहा.