नई दिल्ली: ब्रिटेन की राजनीति में इन दिनों तेज़ हलचल मची हुई है. जेफरी एपस्टीन फाइल्स से जुड़े खुलासों और पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति विवाद के कारण प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर दबाव बढ़ता जा रहा है. हाल ही में उनके प्रमुख सहयोगियों ने इस्तीफे दिए हैं. सोमवार को कम्युनिकेशंस डायरेक्टर टिम एलन ने और 8 फरवरी को चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दिया. स्कॉटिश लेबर पार्टी के नेता अनास सरवार जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी स्टार्मर से इस्तीफा देने की मांग की है.
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ऐसे में लेबर पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं जोरों पर हैं. अगर स्टार्मर को जाना पड़ा, तो कई नाम संभावित उत्तराधिकारी के रूप में उभर रहे हैं. इनमें सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही हैं शबाना महमूद. वह वर्तमान में होम सेक्रेटरी (गृह मंत्री) हैं और लेबर पार्टी की प्रमुख हस्ती हैं. अगर वे प्रधानमंत्री बनीं, तो ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बनेंगी.
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यह देश के लिए एक ऐतिहासिक कदम होगा. शबाना महमूद पाकिस्तान से आए इमिग्रेंट्स की बेटी हैं. उनका परिवार मूल रूप से पाक अधिकृत कश्मीर के मीरपुर का है. वे 2010 से सांसद हैं, पहले वकील रह चुकी हैं और न्याय मंत्री जैसे पद भी संभाल चुकी हैं. वे मार्गरेट थैचर और बेनजीर भुट्टो को अपनी प्रेरणा बताती हैं.
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हालांकि इमिग्रेंट बैकग्राउंड से होने के बावजूद, इमिग्रेशन नीतियों पर उनका रुख काफी सख्त है. होम सेक्रेटरी के तौर पर उन्होंने अनधिकृत आव्रजन पर कड़ी कार्रवाई, बॉर्डर कंट्रोल मजबूत करने, और परमानेंट रेजिडेंसी के लिए योग्यता अवधि बढ़ाने (जैसे 5 से 10 साल) जैसे कदम उठाए हैं. वे असाइलम सिस्टम में बड़े सुधार ला रही हैं, जिसमें रिफ्यूजी स्टेटस को ज्यादा अस्थायी बनाना और आर्थिक माइग्रेंट्स से सख्ती शामिल है. इसी वजह से पार्टी के दक्षिणपंथी गुट उन्हें काफी पसंद करते हैं, और उन्हें इमिग्रेशन पर 'हार्डलाइनर' कहा जाता है.
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स्टार्मर के करीबी सहयोगी होने के नाते उन्हें अनुभवी, स्थिर और भरोसेमंद विकल्प माना जा रहा है. बुकमेकर्स और राजनीतिक विश्लेषकों में उनका नाम दूसरे या तीसरे स्तर के दावेदार के रूप में चल रहा है.
इनके नाम की भी चर्चा
फिलहाल स्टार्मर ने इस्तीफा देने से इनकार किया है और कैबिनेट मंत्री (शबाना महमूद और वेस स्ट्रीटिंग सहित) उनके समर्थन में बयान दे रहे हैं. लेकिन कम अप्रूवल रेटिंग, पार्टी में असंतोष और लगातार इस्तीफों से स्थिति नाजुक बनी हुई है. अगर नेतृत्व बदलाव हुआ, तो शबाना महमूद का नाम ब्रिटेन में डाइवर्सिटी और मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिए बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है.