योगी के राज में कैसे रहा रमजान का पहला दिन, खुद ही मस्जिद क्यों तोड़ने लगे मुसलमान?

Rahul Jadaun 03 Mar 2025 01:05: PM 6 Mins
योगी के राज में कैसे रहा रमजान का पहला दिन, खुद ही मस्जिद क्यों तोड़ने लगे मुसलमान?

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार है और योगी कहते हैं जो कायदे में रहेगा, वो फायदे में रहेगा. इसका एक मतलब ये भी है कि उत्पाद मचाने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा. योगी की ये चेतावनी उत्तर प्रदेश के मौजूदा हालातों में बखूबी दिखाई भी देती है. रमजान का पाक महीना शुरू हो चुका है और योगी के एक फैसले से भाईजान परेशान दिख रहे हैं. योगी के उस फैसले पर आएं उससे पहले संभल की एक तस्वीर आपको दिखाता हूं, जिसे देखकर आप भी कहेंगे. वाह भाई वाह.

हाल ही में प्रयागराज महाकुंभ का समापन हुआ है. सुरक्षा की दृष्टि से तमाम जिलों से आए दमकल वाहनों को महाकुंभ में तैनात किया गया था. संभल से पहुंची दमकल की गाड़ी को भी इसी व्यवस्था में लगाया गया था. लगभग दो महीने बाद जब दमकल की गाड़ी रविवार को जब संभल पहुंची तो उसमें गंगा जल था. खास बात ये रही कि इस दमकल का स्वागत मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पुष्पवर्षा कर किया.

बाद में गंगा जल को नगर के दो तीर्थों में स्थित कुंड में प्रवाहित कर दिया गया, लेकिन उससे पहले दमकल का विधि-विधान से पूजन हुआ. ये तस्वीर क्या दिखाती है. इस खबर को बताने का मसकद सिर्फ इतना है कि आप ये जान सकें कि लोग सनातन और उससे जुड़ी चीजों को लेकर योगी राज में कितना बड़ा बदलाव आया हैं. नहीं तो, अखिलेश यादव सरीखे नेता, जो महाकुंभ को लेकर शुरूआत से ही कमियां गिनाने में लगे थे. क्या कभी संगम जाकर डुबकी लगाते.

खैर सियासत उस गिरगिट की तरह है, जो कब रंग बदल ले, पता नहीं. पर, आपको ये जरूर पता होना चाहिए कि योगी राज में रमजान पर क्या हो रहा है. सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर यूपी में सभी धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर्स को गायब कर दिया गया है. अगर कहीं भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल हुआ तो कार्रवाई के आदेश खुले तौर पर लखनऊ से दिए जा चुके हैं. ऐसे में संभल, बरेली, मुरादाबाद समेत तमाम जगहों पर रमजान की अजान बिना लाउडस्पीकर के ही हो रही है. संभल के मुसलमान योगी सरकार के इस फैसले से इतना परेशान हैं कि दिन में सिर्फ दो मिनट के लिए लाउडस्पीकर बजाने की मांग को लेकर गिड़गिड़ा रहे हैं. AIMIM की तरफ से तो डीएम को बाकायदा एक पत्र भी लिख दिया गया है.

वहीं एक मस्जिद के मौलवी ने दावा किया है कि लाउडस्पीकर की अनुमति नहीं मिली तो रमजान में सहरी के लिए ताशा बजाकर लोगों को अलर्ट किया जाएगा. पर, संभल एसपी ने भी साफ कर दिया है कि मुस्लिम समुदाय के लोग शासन के निर्देशों का पालन करते हुए रमजान में सहरी और इफ्तार करें. नहीं तो एक्शन लिया जाएगा. पुलिस ने शनिवार को ही आधा दर्जन से ज्यादा मस्जिदों से लाउडस्पीकर जब्त किए हैं.

लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर अब तक 6 मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं. हालांकि यहां सवाल ये है कि क्या लाउडस्पीकर के बगैर रमजान नहीं हो सकता. क्योंकि ऐसा तो है नहीं कि सिर्फ मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए गए हैं. सभी धार्मिक स्थलों पर इस आदेश को लेकर सख्ती बरती गई है. यहां तक कि वृंदावन के महान संत प्रेमानंद जी महाराज की रात्रि यात्रा को लेकर भी जब सोसाइटी वालों से सवाल खड़े किए और कहा कि उन्हें रात में परेशानी होती है, तो प्रेमानंद जी महाराज ने खुद ही अपनी यात्रा तब तक रोके रखी, जब तक सोसायटी के अध्यक्ष ने उनसे खुद यात्रा शुरू करने की विनती नहीं की.

ऐसे में अगर किसी चीज से परेशानी हो रही है तो मुस्लिम समुदाय को भी अपना दिल बड़ा रखते हुए आगे आना चाहिए और कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए. दूसरी तरफ यूपी में अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने रमज़ान पर राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए डीजीपी को पत्र लिखा है और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है. हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर पहले से ही यूपी हाई अलर्ट मोड पर है.

रमजान के जुलूस मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती और ड्रोन कैमरों से निगरानी जैसे कदम पहले से ही उठा लिए गए हैं. ये जरूरी इसलिए भी है, क्योंकि रमजान के बीच में ही होली का महाउत्सव भी होना है और जो खबर बरेली से सामने आई है, उसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है, हमें समझ लेना चाहिए. मामला बारादरी के हजियापुर इलाके का है, जहां होली का प्लान बना रहे कुछ हिन्दुओं पर मुसलमानों ने हमला कर दिया.

हजियापुर के रहने वाले लक्ष्मण, मुन्ना, शनि और आकाश ने बताया है कि बीते शाम को वो होली को लेकर प्लान बना रहे थे कि तभी मोहल्ले के ही अयान, सलमान, रेहान, भूरा, आलम समेत अन्य लोगों ने भी उन पर हमला कर दिया. आरोप है कि हमलावरों ने न सिर्फ पिटाई की, बल्कि जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि अगर होली मनाई तो लाशें बिछा देंगे... ये देखकर लगता है कि मुसलमानों के अंदर किस तरह जहर घोला गया है... रमजान पर शांति चाहिए, लेकिन होली पर लाशें बिछाने की धमकी देंगे... ऐसे में अगर इन पर एक्शन लिया तो नेता खड़े होकर बोलेंगे कि देखिए, देश के अल्पसंख्यकों को सताया जा रहा है... गजब हालात हैं... हालांकि इन हालातों के बीच भी योगी आदित्यनाथ ने अपनी लाइन नहीं छोड़ी है कि हम छेड़ते नहीं हैं और अगर कोई छेड़े तो छोड़ते भी नहीं है.

शायद यहीं वजह है कि योगी राज में मुस्लिम समुदाय से जुड़े ज्यादातर लोग धार्मिक मामलों में भी नियमों औऱ निर्देशों का पालन करने दिखे रहे हैं. हाल ही में गोरखपुर से तस्वीर आई थी, जहां मुतवल्ली खुद ही मस्जिद अबु हुरैरा को तोड़ते हुए दिखाई दिए थे. मामले से जुड़ा वीडियो भी सामने आया था. प्रशासन का कहना है कि इस मस्जिद का निर्माण नगर निगम की जमीन पर किया गया है. और तो और इस मस्जिद का नक्शा तक पास नहीं करवाया गया है.

इसीलिए विकास प्राधिकरण ने इस मस्जिद को अवैध करार देते हुए 15 दिनों का नोटिस दिया था. नोटिस में ये लिखा गया था कि अगर खुद से मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई नहीं की गई तो फिर प्रशासन ये कार्रवाई करेगा और इसका खर्चा भी वसूलेगा. अब इसे डर कहिए या कुछ और 15 दिन पूरे होते इससे पहले ही मुस्जिद को तोड़े का वीडियो सामने आ गया.

हालांकि ये सब अचानक नहीं हुआ. अतिक्रमणकारियों के अंदर प्रशासन का खौफ यूं ही नहीं बैठा है. बुलडोज़र बाबा की सख्ती और अधिकारियों को फ्री हैंड दिया जाना, इसके पीछे बड़ी वजह है. संभल में जिस तरह बुलडोजर चला, उसे देखकर हर किसी को समझ आ गया कि कानून अगर चाहे तो कुछ भी संभव है. हाल ही में कुशीनगर की मदनी मस्जिद को तो रातों-रात गिरा दिया गया.

हालांकि ये मामला कोर्ट में पहुंचा है पर, सरकार को भी पता है कि कोर्ट का सहारा लेकर कैसे मामलों को दशकों तक टाला जाता है. ऐसे में त्वरित कार्रवाई का प्रावधान योगी सरकार ने लागू कर रखा है. इसका मतलब ये है कि फैसला जल्द से जल्द हो. हमीरपुर का ही उदाहरण ले लीजिए. यहां मौहदा इलाके के एक कब्रिस्तान में अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किए जाने की शिकायत मिली तो आनन-फानन प्रशासन ने लेखपाल से उस जमीन की जानकारी मांगी.

निर्माण अवैध पाए जाने पर बुलडोजर की मदद से उसे ध्वस्त भी कर दिया गया. साथ ही पांच नामजद जिसमें मौदहा नगर पालिका अध्यक्ष, लखनऊ में पुलिस लाइन में तैनात सिपाही समेत 250 अज्ञात लोगों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया. ये मामला दर्शाता है कि योगी सरकार में गलत काम करने वाले हर इंसान को सजा मिलेगी. इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वो अधिकारी या खूंखार अपराधी.

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