लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी दलों ने अभी से अपनी-अपनी जमीन मजबूत करनी शुरू कर दी है. सबसे ज्यादा नजर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन और सीट बंटवारे पर है. कांग्रेस नेता इमरान मसूद लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनसे गठबंधन में सीटों को लेकर दबाव की राजनीति के संकेत मिल रहे हैं.
इमरान मसूद ने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 107 सीटें मिली थीं और उस समय पार्टी के दो सांसद थे. अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे. उन्होंने मौजूदा राजनीतिक स्थिति को कांग्रेस के लिए बेहतर बताते हुए कहा कि अब पार्टी की सीटें बढ़नी चाहिए.
इमरान मसूद के इस बयान को 2027 के सीट बंटवारे की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है. चर्चा है कि कांग्रेस यूपी में 110 से ज्यादा सीटों पर दावा कर रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या समाजवादी पार्टी कांग्रेस को इतनी बड़ी हिस्सेदारी देने के लिए तैयार होगी.
दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और गठबंधन को अच्छी सफलता मिली थी. इसके बाद से दोनों दलों के बीच विधानसभा चुनाव में भी साथ उतरने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनाव का गणित अलग होता है. सीटों की संख्या, स्थानीय संगठन और उम्मीदवारों की ताकत जैसे मुद्दे सीट बंटवारे में अहम भूमिका निभाएंगे.
सपा के सामने चुनौती यह होगी कि वह अपने मजबूत क्षेत्रों को सुरक्षित रखते हुए कांग्रेस को ऐसी सीटें दे, जहां उसका संगठन और जनाधार प्रभावी हो. वहीं कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग करके 2027 में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहती है.
अब असली सवाल यही है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन का आधार क्या होगा और सीटों का फार्मूला किस तरह तय किया जाएगा. क्या कांग्रेस को 110 से ज्यादा सीटें मिलेंगी या अखिलेश यादव सीटों की संख्या सीमित रखेंगे. इन सवालों का जवाब आने वाले महीनों में यूपी की सियासत की दिशा तय कर सकता है.