Global Bharat TV Exclusive: आज आपको बताते हैं....जब UP में योगी मुख्यमंत्री नहीं थे? तब अखिलेश यादव की सरकार में साल 2013 का महाकुंभ कैसा था? आज़म ख़ान मेला मंत्री थे, मुख्य सचिव जावेद उस्मानी थे, ढिंढोरा पिंटने के लिए हावर्ड यूनिवर्सिटी तक प्रचार किया गया. पर सच्चाई ऐसी थी कि कोई हिन्दू सपा को पसंद नहीं करेगा. अखिलेश यादव 15 मार्च 2012 को शपथ लेते हैं और कुछ महीने बाद ही महाकुंभ आ गया...आज़म ख़ान को शहरी विकास मंत्रालय के साथ-साथ महाकुंभ के इतिहास में पहली बार मेला मंत्री का पद बनाया उस पद पर भी बैठाया.
उस महाकुंभ में बीजेपी के तात्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी डुबकी लगाने पहुंचे...व्यवस्था ऐसी थी कि देश के ज्यादातर VVIP नहीं आए...जब अखिलेश यादव सरकार के महाकुंभ की पोल खुली तो सपा सांसद जया बच्चन के पति अमिताभ बच्चन को सोशल मीडिया पर लिखना पड़ा. (इंतज़ामों की आलोचना करना आसान है. तो ऐसा हुआ क्या था? अब विस्तार से सुनिए....बेटे की सरकार में असली सीएम तो मुलायम सिंह यादव ही थे...और मुलायम के करीबी अतीक जैसे माफिया थे. प्रयागराज में मेला मंत्री आज़म के इशारे पर सपा नेताओं, अतीक अहमद के ख़ास लोग और एक जाति को टेंडर दिया गया. CAG की रिपोर्ट इसका खुलासा करती है.
महाकुंभ में सपा सरकार के मैनजमैंट में भारी कमी पाई गई. आज़म ख़ान का मंत्रालय और IT स्टेट मिनिस्टर अभिषेक मिश्रा के बीच कोई तालमेल नहीं था...अभिषेक मिश्रा अखिलेश यादव के ख़ासम खास नेताओं में से थे. आज़म ख़ान ने अपने सचिवों, IAS, IPS की टीम बनाई. जिसमें मुख्य सचिव जावेद उस्मानी थे...2013 में महाकुंभ का बजट करीब 1300 करोड़ था...जिसमें बंदबांट हुई ये बात भी CAG रिपोर्ट में लिखी गई है. ये रिपोर्ट जुलाई 2014 की है.
CAG रिपोर्ट के बाद आप एक और रिपोर्ट देखिए...हावर्ड यूनिवर्सिटी से अखिलेश यादव और आज़म ख़ान को न्यौता आया...दोनों अमेरिका के बोस्टन एयपोर्ट उतरे तभी सुरक्षाकर्मियों ने आज़म ख़ान को रोक लिया, 10 मिनट के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ हुई और अखिलेश यादव इतज़ार करते रहे. कुछ देर बाद अखिलेश को गुस्सा आ गया कि आज़म ख़ान से पूछताछ क्यों की गई? आप हंसेंगे दोनों नेता वहां से ही वापस लौट आए, हावर्ड तक नहीं पहुंच पाए. इन दोनों के लौट आने के बाद मुख्य सचिव जावेद उस्मानी मेला की सफलता पर लेक्चर देने गए, यानि मोदी नहीं थे, तो अमेरिका में आज़म जैसों को बैठा लिए जाता था.
आप ये भी कह सकते हैं कि अखिलेश यादव और आज़म ख़ान को बहाना मिला और वो डरकर अमेरिका से लौट आए, क्योंकि हावर्ड यूनिर्सिटी में महाकुंभ के आयोजन पर लेक्चर देना था. उस कार्यक्रम का नाम था..’हावर्ड विदाउट बॉर्डर्स: मैंपिंग द कुंभ मेला’. यानि वहां जाते तो क्या बोलते? ये बोलते कि महाकुंभ में तब सिर्फ 12 करोड़ लोग आए तब भी उनके लिए बेसिक सुविधाओं का भी इंतजाम नहीं कर पाए थे. या ये बताते कि महाकुंभ में 10 फरवरी 2013 को मौनी अमावस्या के मौके पर अखिलेश की टीम सिर्फ 12 लाख लोगों के आने का अनुमान लगाकर बैठी थी, लेकिन उस दिन 3 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे और सपा सरकार की व्यवस्था की पोल खुल गई. दुनिया ने देखा मुलायम की तरह अखिलेश यादव भी वोट के लिए अपनी सभ्यता भी भूल गए. इलाहाबाद जंक्शन पर पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए श्रद्धालुओं पर लाठी चार्ज किया, आख़िरी वक्त पर स्टेशन मास्टर ने प्लेटफॉर्म नंबर बदल दिया और भगदड़ मच गई. जिसमें 36 लोगों की मौत हुई.
अमिताभ बच्चन को लिखना पड़ा, सपा सरकार ने खूब मीडिया में प्रचार करवाया लेकिन सच ये था कि महाकुंभ का आयोजन जो भव्य और दिव्य होना चाहिए वो दिखा ही नहीं. भारत सरकार से मिले फंड का तो 99 फीसदी खर्च हुआ, यानि करीब 1200 करोड़, लेकिन सपा सरकार ने अपना फंड पूरा बचा लिया और सिर्फ 1% खर्च किया..CAG रिपोर्ट में लिखा गया.
इसके बाद आज़म ख़ान ने जौहर अली जिन्ना यूनिर्सिटी में ‘जश्न-ए-जौहर’ कार्यक्रम करवाया, फंड महाकुंभ का लगा, ऐसे भी आरोप लगे. कार्यक्रम सैफई महोत्सव से भी ज्यादा महंगा था. आप जानकर हैरान होंगे कि रामपुर महोत्सव का नाम बदलकर भी ‘जश्न-ए-जौहर’ कर दिया. महाकुंभ के बाद आज़म जश्न मना रहे थे. 36 लोगों की मौत हुई लेकिन केंद्र सरकार में रेल मंत्री पवन बंसल, मेला अध्यक्ष आज़म ख़ान, जावेद उस्मानी और सभी जिम्मेदारों में से किसी पर भी कार्रवाई नहीं हुई? किसी का इस्तीफा नहीं हुआ. बल्कि उल्टा तारीफ हुई.
अखिलेश यादव ने कहा कि ये दुर्घटना महाकुंभ मेला क्षेत्र से बाहर हुई है. इसलिए इस्तीफा लेने का सवाल ही नहीं उठता है. इस्तीफा खारिज करते हुए आजम खान की तारीफ की. कहा जाता है कि अखिलेश यादव आज़म ख़ान के आगे पूरी तरह से नतमस्तक थे, महाकुंभ का फंड मुख्यमंत्री से पूछे बिना आज़म ने उड़ा दिए. अमेरिका से आज़म ख़ान के लिए बिना माला पहने ही लौट आए. रामपुर महोत्सव का नाम जश्न-ए-जौहर बिना पूछे ही बदल दिया. अखिलेश यादव हिन्दू होने का नाटक करते रहे. 2013 में सपा सरकार के महाकुंभ के बाद अब योगी सरकार भी महाकुंभ करवा रही है? और वक्त आ गया है आपको बताने का कि योगी आदित्यनाथ ऐसा करवा रहे हैं कि दुनिया का हर इंसान महाकुंभ आना चाहता है.
मेला क्षेत्र को 10 जोन, 25 सेक्टर, 56 थाने और 155 चौकियों में एक नए जिले के तौर पर अलग किया गया है. मेला क्षेत्र में महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों, शिविरों, पुलों और घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था का इतजाम है. पानी के भीतर कमांडो रहेंगे, डूबने से जान जाने की संभावना कम है. 1300 से अधिक महिला पुलिसकर्मी महिला श्रद्धालुओं को सुरक्षा प्रदान करेंगी…कपड़ा बदलने, सुरक्षा, कोई छेड़छाड़ ना करे, महिला या किसी बेटी को दिक्कत ना हो इसके लिए कई पुलिसकर्मी सादी वर्दी में भी तैनात रहेंगे. 7500 करोड़ का बजट है. दुनिया का सबसे बड़ा तंबुओं का शहर बनेगा. अमेरिका, जापान हर कोई महाकुंभ के बाद योगी को बुलाने वाला है. क्योंकि सपा सरकार में सिर्फ 12 करोड़ हिन्दू पहुंचे, और योगी सरकार का लक्ष्य 40 से 45 करोड़ का है.
यानि दुनिया भर में हिन्दुओं की कुल आबादी का लगभग 40 फीसदी गंगा में डुबकी लगाएगा. चार हज़ार हेक्टयर में 2000 हज़ार तंबू और 25 हज़ार सार्वजनिक आवास तैयार किए गए हैं. यानि एक सार्वजनिक आवास में कई परिवार रह सकते हैं. सुरक्षा के लिए यूपी के DGP प्रशांत कुमार हैं...जो पुलिस को स्मार्ट बनाने के लिए लगे हैं, तो STF चीफ़ अमिताभ यश विरोधियों को रोकने के लिए IB और रॉ संपर्क में है. सिंघम IPS अजय पाल शर्मा को मेला जिले का कमिश्नर बनाकर भेजा है. सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए 200 करोड़ रूपए के उपकरण खरीदे गए हैं. एंट्री ड्रोन सिस्टम भी लागू है...यानि कोई ड्रोन से भी खुराफात नहीं कर पाएगा. 50 हज़ार जवान जिसमें पैरा मिलिट्री फोर्स भी शामिल हैं.
BSF यानि जो पाकिस्तान बॉर्डर पर जवान तैनात रहते हैं वो मेला में भी इलाज करेंगे. अगर आप कहीं खो जाएं तो भागना नहीं है...आपका आदमी वहीं पहुंचा जाएगा, इसके लिए ऑनलाइन खोया-पाया केंद्र बनाया गया है. 100 बेड का अस्थाई हॉस्पिटल भी बनाया गया है. आस-पास के ज़िलों के DM और SP को निर्देश दिए गए हैं कि महाकुंभ में हर आवश्यकता के लिए तैयार रहें. योगी के राज़ में जब महाकुंभ हो रहा है तब अतीक के घर हमारी सहयोगी नंदिनी शुक्ला गई. वहां की तस्वीरें देखिए, अतीक का घर बिखरा पड़ा है. अशरफ के घर पर ताला लगा है. अतीक का मुहल्ला डरा है. क्योंकि पुलिस ने हर घर पहुंच कर ये संदेश पहुंचा दिया कि कोई भी चूं हुई तो सात पुश्ते याद रखेंगी. अब आप फर्क निकालिए और बताइए अखिलेश यादव क्या वाकई हिन्दुओं के लिए दिल में जगह रखते हैं या सिर्फ आज़म ख़ान और वोट के लिए हिन्दुओं के सबसे बड़े आयोजन को भी भूल गए थे. फर्क साफ है.