नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. विदेश मंत्रालय ने ईरान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन मोहम्मद जवाद होसैनी समेत अन्य डिप्लोमैट्स को तलब किया है.
संयुक्त अरब अमीरात के अनुसार, ईरानी क्रूज मिसाइलों ने ओमान जल क्षेत्र में दो यूएई-ध्वज वाले टैंकरों मोम्बासा और अल बहिया पर हमला किया. इस हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हुए, जिनमें छह भारतीय और दो यूक्रेनी शामिल हैं. चार घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है.
विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए तत्काल डी-एस्केलेशन की अपील की है. MEA ने कहा, ''क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक ढांचों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार क्षेत्र के जलमार्गों में स्वतंत्र और निर्बाध नौवहन बहाल किया जाए.'' ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने हमले की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए दावा किया कि जहाजों ने चेतावनी की अनदेखी की और खतरनाक रूट चुना.
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क का प्रस्ताव रखा है, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया है. भारत ने ईरान से सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की मांग की है. होर्मुज दुनिया के तेल और गैस परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है, इसलिए यह घटना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी चिंताजनक है.