पाकिस्तान की गोलाबारी में मस्जिद को हुआ नुकसान, भारतीय सेना की मदद से दोबारा हुई तामीर

Amanat Ansari 21 May 2025 08:48: AM 2 Mins
पाकिस्तान की गोलाबारी में मस्जिद को हुआ नुकसान, भारतीय सेना की मदद से दोबारा हुई तामीर

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के इबकोट गांव के छोटा गांव मोहल्ला में हाल ही में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी के कारण एक स्थानीय मस्जिद को काफी नुकसान पहुंचा. इस गोलाबारी से मस्जिद की छत, खासकर कॉरुगेटेड गैल्वनाइज्ड आयरन (सीजीआई) शीट्स, सोलर प्लेट सिस्टम और प्रार्थना कक्ष के अंदर की चटाई को नुकसान हुआ. इस घटना ने स्थानीय समुदाय को बहुत परेशान किया, क्योंकि मस्जिद न केवल पूजा का स्थान है, बल्कि समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक केंद्र भी है.

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भारतीय सेना ने इस स्थिति में तुरंत कार्रवाई की और मस्जिद की मरम्मत में मदद की. सेना ने छत को ठीक किया, सोलर ऊर्जा सिस्टम को बहाल किया और क्षतिग्रस्त चटाइयों को बदल दिया. इस मरम्मत कार्य ने मस्जिद को फिर से उपयोग के लिए तैयार कर दिया, जिससे स्थानीय लोग अपनी धार्मिक और सामुदायिक गतिविधियां फिर से शुरू कर सके. इबकोट के निवासियों ने भारतीय सेना के इस सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया. समुदाय के लोगों ने सेना की भूमिका को सराहा, जो न केवल सीमा पर सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि इस तरह के संकट में भी सहायता करती है.

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यह सहायता भारतीय सेना के उन प्रयासों का हिस्सा है, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों का समर्थन करने के लिए किए जाते हैं. यह घटना उस समय हुई, जब पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ बिना उकसावे के हमले किए. ये हमले भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में थे, जो पड़ोसी देश और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था. ऑपरेशन सिंदूर एक सटीक हमला था, जो पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी.

इस तरह के हालात में भारतीय सेना का यह कदम न केवल मस्जिद की मरम्मत तक सीमित रहा, बल्कि यह स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास और एकजुटता को बढ़ाने का भी एक उदाहरण है. सेना की इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि वह न केवल देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि संकट के समय में नागरिकों की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहती है. इबकोट के लोगों ने सेना के इस कार्य को "भाईचारे और मानवता का प्रतीक" बताया और इसके लिए उनका धन्यवाद किया. यह घटना सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना और स्थानीय लोगों के बीच मजबूत रिश्ते को दर्शाती है.

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