नई दिल्ली: सोनम वांगचुक इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ अनशन पर हैं और उनकी बिगड़ती सेहत सुर्खियों में है. लेकिन यह पहली बार नहीं है जब वांगचुक परिवार ने अनशन का रास्ता चुना हो. उनकी इस जिद की जड़ें पिता सोनम वांग्याल तक जाती हैं, जिनका अनशन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद तुड़वाया था.
सोनम वांग्याल लद्दाख के जाने-माने नेता थे. वर्ष 1975 में वे जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री भी रहे. उस समय उन्होंने लद्दाख के मुद्दों को लेकर भूख हड़ताल की थी. कहानी में जिक्र है कि इंदिरा गांधी ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर उनके अनशन को समाप्त करवाया. आज जब उनका बेटा सोनम वांगचुक छात्रों के भविष्य और परीक्षा सुधार को लेकर अनशन पर बैठा है तो यह विरासत याद आ रही है. भूखा रहने की ताकत और मुद्दों के लिए संघर्ष करने की जिद वांगचुक को पिता से मिली लगती है.
वर्तमान में सोनम वांगचुक का 19वां दिन चल रहा है और उनका वजन 9 किलो से ज्यादा घट चुका है. राज ठाकरे समेत कई नेताओं ने उनका समर्थन किया है, जबकि सरकार पर दबाव बढ़ रहा है. पिता-पुत्र दोनों पीढ़ियों की यह अनशन कहानी लद्दाख की लड़ाई और सामाजिक न्याय की निरंतरता को दर्शाती है.