गाजियाबाद से निकला एक लड़का, जिसके पिता इंडियन एयरफोर्स में रहे, देश के अलग-अलग स्कूलों में पढ़ता है, पिता का जहां ट्रांसफर होता, वहां क्लास लेता, बड़ा होकर BHU जैसे संस्थान से पढ़ा, सपना विदेश जाकर पढ़ने का था, लेकिन न तो पिता के पास इतने पैसे थे, और ना ही कोई ऐसी संपत्ति जिसे बेचकर आगे बढ़ सके, परीक्षा देते-देते एक यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप मिलती है, और 90 के दशक में जेब में करीब 1700 रुपये जो कि अमेरिका के हिसाब से तब 100 डॉलर थे, लेकर बोस्टन की नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी में पहुंच जाता है. वहां दिन में पढ़ाई करता और रात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी, एक वक्त ऐसा भी आया जब जरूरतें पूरी करने के लिए सेल्समैन की नौकरी करनी पड़ी. पर पढ़ाई पूरी होते ही चुनौतियां खत्म नहीं हुई थी. बल्कि डिग्री के बाद भी तुरंत नौकरी नहीं मिली, करीब 400 कंपनियों ने उन्हें रिजेक्ट किया, और आज भी वो रिजेक्शन लेटर निकेश अरोड़ा ने संभालकर रखे हैं.
घर से 1700 लेकर निकले, सिक्योरिटी गार्ड की मिली नौकरी, 400 बार हुए रिजेक्ट!

साल 1992 में इन्हें पहली सफलता तब मिली जब फिडेलिटी इन्वेस्टेमेंट में नौकरी मिली। वहां इतनी मेहनत की कि फिडेलिटी टेक्नोलॉजी में बाद में वाइस प्रेसिडेंट की कुर्सी तक पहुंचे। फाइनेंस में कई डिग्रियां लेने के बाद इन्होंने पढ़ाना भी शुरू किया, फिर गूगल में नौकरी मिली। करीब 10 साल तक गूगल के साथ नौकरी करने के बाद साल 2014 में सॉफ्टबैंक कंपनी से जुड़े। साल 2018 में इनकी किस्मत तब बदली जब पालो ऑल्टो नेटवर्कस ने इन्हें CEO बना दिया। मेहनत का नतीजा ये कि कंपनी की वैल्यू 18 बिलियन डॉलर से 130 बिलियन डॉलर पहुंचा दिया
साल दर साल इनकी सैलरी भी बढ़ती चली गई, और लोगों को इनके बारे में पता तब चला जब अमेरिका के मशहूर अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने साल 2023 में सबसे ज्यादा सैलरी लेने वाले सीईओ की लिस्ट जारी की. तब पता चला साइबर सिक्योरिटी कंपनी पालो ऑल्टो नेटवर्क के सीईओ निकेश अरोड़ा की कमाई 151.43 मिलियन जॉलर है. इन्होंने कमाई में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और गूगल के सुंदर पिचाई को भी पीछे छोड़ दिया. जब हर तरफ निकेश की चर्चा होने लगी तो ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे ने इनका इंटरव्यू लिया, जिसमें इन्होंने अपने बचपन से अब तक का किस्सा सुनाया, इसी दौरान निकेश अरोड़ा एक मजेदार वाकया भी शेयर करते हैं, वो बताते हैं
साल 2012 में चमकी किस्मत फिर...

साल 2012 में वो गूगल के सबसे महंगे कर्मचारी बने, जब उन्हें 51 मिलियन डॉलर का पैकेज मिला. उसके बाद सॉफ्टबैंक ने 135 मिलियन डॉलर के पैकेज पर नौकरी दी. और जब पाओ ऑल्टो नेटवर्क ज्वाइन किया तो वहां करीब 860 करोड़ रुपये सालाना का पैकेज मिला. इसके अलावा 125 मिलियन डॉलर के शेयर और 10 लाख डॉलर का टारगेट बोनस भी मिला. जो कि करीब 8 करोड़ 60 लाख रुपये होता है.
यानि निकेस अरोड़ा इतना बोनस कमाते हैं जितना की दुनिया में कई लोगों की सालाना सैलरी नहीं है. आज गाजियाबाद के लड़के ने अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में झंडा गाड़ दिया है. आज पूरे देश को इन पर गर्व है, और हमने आपको इनकी कहानी इसीलिए सुनाई ताकि समझ सकें कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हो अगऱ आपने ठान लिया कि आगे बढ़ना है तो फिर आपको कोई नहीं रोक सकता. निकेश अरोड़ा की कहानी उन लोगों तक आपको जरूर पहुंचानी चाहिए, जो परिस्थितियों से लड़ते हुए खुद को साबित करने की चुनौती को स्वीकार कर रहे हैं, और खुद को हर हाल में आगे बढ़ाना चाहते हैं.