नई दिल्ली: ये है पाकिस्तान के कराची शहर का ओरंगी टाऊन, जो झुग्गी बस्तियों के मामले में दुनिया में सेकेंड नंबर पर है, जबकि पहले नंबर पर है, दक्षिणी सूडान, जहां गरीबी की वजह से 90 फीसदी लोग झुग्गियों में रहते हैं...
मुंबई के धारावी की मलिन बस्तियों का नाम इस लिस्ट में काफी नीचे हैं, पर यूपी के लखनऊ में जिस हिसाब से झुग्गियां बन रही है, हजारों परिवार जगह-जगह झुग्गियां बना रहे हैं, उसी के अंदर अपना मदरसा, मकतब और स्कूल खोल रहे हैं, यहां तक कि अपना मौलाना और खतना करने के लिए अपना डॉक्टर बुला रहे हैं, वो साफ बता रहा है कुछ लोग लखनऊ में रिकॉर्ड तोड़ झुग्गियां बनवाना चाहते हैं...और काम में वहीं के स्थानीय लोग शामिल हैं...ऐसे ही दो चेहरों से आपको मिलवाते हैं...
पहले नंबर पर हैं ये हैं लखनऊ में रहने वाले रावत जी, जिन्होंने अपनी जमीन 3 महीने के लिए किराये पर दी थी, जहां बाहर से लोहे का गेट लगा है, पर अंदर कई झुग्गियां बनी हैं, और जब ग्लोबल भारत टीवी की टीम पहुंची तो कहने लगे हमने इन्हें खाली कराने का नोटिस दिया है....
जबकि दूसरे नंबर पर हैं लखनऊ के यादवजी, जिन्होंने अपनी 3 बीघे जमीन उन लोगों को किराये पर दी है, जो बाहर से आकर झुग्गी बनाकर रह रहे हैं, कबाड़ का काम कर रहे हैं, और पूछने पर कहते हैं नुकसान हो रहा था तो क्या करते...
यहां तक कि बिजनौर में जाट की जमीन पर बाहरियों ने कई झुग्गियां बना रखी है...अब दिक्कत जमीन किराये पर देने में नहीं है, बल्कि जमीन आप किसे दे रहे हैं, ये ठीक से पता नहीं करने में है, क्योंकि योगी सरकार और यूपी पुलिस को ये शक है कि झुग्गी-बस्तियों में घुसपैठिए छिपे हो सकते हैं, जगह-जगह झुग्गियों में इसके लिए पुलिस दबिश भी दे रही है..और ग्लोबल भारत टीवी घुसपैठियों की पड़ताल में एक खास मुहिम भी चला रहा है, जिसमें रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं....
सबसे पहला खुलासा जो हमारे कैमरे में कैद हुआ वो था, लखनऊ से बारपेटा पहुंचा खतना गैंग, जिसका पोस्टर बकायदा लखनऊ की झुग्गियों में लगा था, जिसका कोई जवाब वहां के लोग नहीं दे पाए कि आखिर बारपेटा के बच्चों का खतना करने के लिए बारपेटा से ही कोई क्यों बुलाया जा रहा है....
इसके बाद होता है दूसरा खुलासा, जिसमें बारपेटा का व्यक्ति ही स्कूटी पर सामान लेकर बारपेटा के लोगों की झुग्गियों में घूमता है, उन तक जरूरत की चीजें पहुंचाता है....और पूछने पर ठीक से आसामी नहीं बोल पाता...
पर बात यहीं खत्म नहीं होती बल्कि इसके बाद होता है तीसरा बड़ा खुलासा, जिसमें लखनऊ की झुग्गियों में, जहां करीब हजार परिवार रहने का दावा किया जाता है, वहां बारपेटा के एक मौलाना मिलते हैं, जो वहां के बच्चों को नमाज पढ़ाते हैं, कुरान पढ़ाते हैं, पर राष्ट्र के सवाल पर अटक जाते हैं...और राष्ट्र बड़ा या धर्म के सवाल पर कहते हैं, हमारे लिए धर्म बड़ा है...
तो फिर सवाल उठता है ये बच्चों को राष्ट्रवाद कैसे सीखाएंगे, देशभक्ति का पाठ कैसे पढ़ाएंगे, और इन्हें बारपेटा से लखनऊ आने की जरूरत क्यों पड़ रही है...असम के जिस बारपेटा जिले की जनसंख्या बीते 10 सालों में अभूतपूर्व तरीके से बदली, जहां मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी, वहां से भारी संख्या में मुस्लिम ही क्यों पलायन कर रहे हैं, बारपेटा का कोई हिंदू हमारे कैमरे में अब तक कैद क्यों नहीं हुआ...क्या इनके बीच कोई घुसपैठिया भी छिपा है...ये बड़ा सवाल है...