नई दिल्ली: कई मुस्लिम महिला नेता हिजाब पहनती हैं, कोई बुर्का पहनती हैं, लेकिन यूपी की कैराना से सांसद इकरा हसन बुर्का नहीं पहनतीं, जिसे लेकर उनसे जब एक इंटरव्यू में सवाल पूछा गया तो उन्होंने बड़ा ही चौंकाने वाला जवाब दिया, साथ ही वो ये भी बताती हैं कैसे लंदन से लौटकर उन्होंने यूपी की सियासत में कदम रखा. इकरा कहती हैं ‘इसलिए मुझे पॉलिटिक्स पसंद है’
14 साल की थी, जब उनका देहांत हो गया, मेरे वालिद का मेरी जिंदगी का बड़ा योगदान, उनकी ही विरासत को अब आगे बढ़ा रही हूं, 16 साल हो गए उनके न रहते, आज भी कोई न कोई उनके किस्से लोग सुनाते हैं, इसीलिए मुझे पॉलिटिक्स अच्छी लगती है.
‘हिजाब या न हिजाब ये च्वाइस है’
हिजाब या न हिजाब ये च्वाइस है, ये च्वाइस ओपन रखनी चाहिए, अगर आप मुझे मना कर रही हैं तो ये लोकतंत्र नहीं है, और जबरदस्ती पहना रहे तो भी लोकतंत्र नहीं है, ये मुद्दा पब्लिक फोरम पर ये डिसाइड करने लायक नहीं है, पश्चिमी देशों में भी हिजाब है, पर वो मुद्दा वहां नहीं है, ये सब बेकार की बातें हैं. मैं मुस्लिम महिला हूं, लेकिन जिस क्षेत्र से आती है, वहां हर महिला इसी तरीके से सिर ढंकती है. क्या पहना है, क्या कर रही हैं, ये डिस्कस नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके लिए नीतियां डिस्कस होनी चाहिए.
इकरा हसन ने निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कई मुद्दों पर खुलकर राय रखी और महिला आरक्षण बिल पर ये साफ कहा कि अभी महिलाओं को 10 साल और इंतजार करना होगा, क्योंकि बिल में ये प्रावधान है कि परिसीमन के बाद सीटें बढ़ेंगी तभी महिलाओं को आरक्षण मिलेगा, जबकि हमारी मांग है कि इसे अभी से ही लागू किया जाना चाहिए. दरअसल इकरा हसन एक राजनीतिक परिवार से आती हैं, इनके भाई फिलहाल विधायक हैं, पिता भी सियासत में रहे हैं.