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नई दिल्ली: इकरा हसन ने मोदी सरकार के सामने ऐसी कौन सी मांग रखी कि संसद में मौजूद कई सांसद सोच में पड़ गए. भले ही इकरा की इस मांग के पीछे सियासत हो या फिर दिल से ये मांग रखी हो पर इकरा जब ये बातें बोल रही थीं, उनके पीछे बैठे नेताजी बड़ी तेजी से हंस रहे थे, जो कई लोगों को पसंद नहीं आया, क्योंकि इकरा जब बोल रहीं थीं, स्पीकर ओम बिरला उनसे कह रहे थे, अब हो गया, बैठिए, बैठिए, लेकिन इकरा कह रहीं थीं सर बस एक मिनट. बता दें कि इकरा हसन खुद को ओवैसी की तरह मुस्लिमों का नेता मानती हैं, और लंदन के अधिकारियों से अब उन्होंने दिल्ली में क्यों मुलाकात की, आखिर इस तस्वीर के पीछे की कहानी क्या है.

दरअसल, इकरा हसन किसानों की सम्मान राशि 6 हजार से बढ़ाकर 12 हजार करवाना चाहती हैं, जिसके पीछे सियासत ये भी हो सकती है कि सपा खुद को किसानों का हितैषी बताए, मोदी सरकार में किसानों ने आंदोलन भी किए हैं, तो इकरा की ये मांग कई तरीके की इशारा करती है, चूंकि इकरा ने सांसदों की सैलरी बढ़ाए जाने के प्रस्ताव पर ये भी कहा था कि या तो सैलरी बढ़ाइए या फिर ये भी रख लीजिए, इसलिए किसानों की बात कर इकरा ने शायद ये कह दिया कि हम सिर्फ अपनी ही बात नहीं करते बल्कि गरीबों और किसानों का मुद्दा भी सदन में उठाती हूं. और वाकई ये उठाना भी चाहिए, पर इकरा हसन दिल्ली में लंदन के अधिकारियों से मुलाकात क्यों करती हैं, ये 3 तस्वीरें उन्होंने 25 मार्च को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की है.

पहली तस्वीर में इकरा और सारे दिग्गज डाइनिंग टेबल के सामने बैठे हैं, तो वहीं दूसरी तस्वीर में सबके बीच लगता है गहन चर्चा चल रही है, जबकि तीसरी तस्वीर ग्रुप फोटो की है. जानकारी जुटाने पर पता चलता है कि संसद के युवा सदस्यों के साथ ब्रिटिश उच्चायोग नई दिल्ली में विदेशी राजनयिकों के साथ एक मीटिंग में इकरा हसन शामिल हुईं, ये उसी की तस्वीरें हैं...

खास बात ये है कि इकरा हसन लंदन से ही पढ़कर लौटी हैं, लंदन की SOAS यूनिवर्सिटी से इन्होंने पढ़ाई की, कहा जाता है कि वहां से जब ये पीएचडी की पढ़ाई कर रही थीं, तभी यहां इनके भाई को जेल में डाल दिया गया, मां की भी परेशानियां बढ़ने लगी, नतीजा प्रोफेसर बनने का ख्वाब छोड़कर ये वापस हिंदुस्तान आईं, और भाई के लिए जमकर प्रचार किया, तब सपा और आरएलडी का गठबंधन हुआ करता था, उस दौरान जयंत चौधरी ने इनका भरपूर साथ दिया, अखिलेश यादव ने टिकट का भरोसा दिया, उसके बाद साल 2024 में चुनाव लड़ीं और सांसद बन पाईं, ये बात बेहद कम लोग जानते हैं कि इकरा ने साल 2024 से पहले भी एक चुनाव लड़ा था, मीडिया रिपोर्ट बताती है कि इकरा हसन जब सिर्फ 20 साल की थीं, तब साल 2015 में उन्होंने शामली से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था, लेकिन 5 हजार वोटों से इन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

कहते हैं उस हार से भी इकरा ने काफी कुछ सीखा था, आज जनता के बीच कैसे जाना है, क्या बोलना है, कैसे लोगों को जोड़ना है, ये सब इकरा हसन इतनी बेहतर तरीके से समझती हैं कि क्षेत्र के मुस्लिम ही नहीं बल्कि दूसरे समुदाय के लोग भी इनके काम की तारीफ करते हैं, खुद इकरा ये मानती हैं कि सिर्फ मुस्लिम वोटबैंक के सहारे मैं चुनाव नहीं जीत सकती थी. आप इकरा की इन मांगों पर क्या कहेंगे, कमेंट कर अपनी राय जरूर दें.