तेहरान: ईरान रोजाना 30 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल उत्पादन करता है, जिसमें से अधिकांश इसका मुख्य निर्यात टर्मिनल खार्ग द्वीप से होता है. अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बीच, ईरान अब बिना बिके कच्चे तेल को स्टोर करने के लिए जगह खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है. अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी के कारण पर्सियन गल्फ से टैंकर बाहर नहीं निकल पा रहे हैं.
ईरान ने पुराने ऑफशोर टैंकों और फ्लोटिंग स्टोरेज जहाजों को फिर से सक्रिय किया, लेकिन वे भी बहुत जल्दी भर गए. चूंकि तेहरान उत्पादन पूरी तरह बंद नहीं कर सकता, क्योंकि इससे भूमिगत भंडारों को स्थायी नुकसान हो सकता है. इसलिए ऐसा लगता है कि वह अतिरिक्त तेल समुद्र में फेंक रहा है.
सैटेलाइट इमेज से मिल रहे हैं सबूत
ईरान के मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल खार्ग द्वीप के पास समुद्र की सतह पर बड़े-बड़े काले धब्बे दिखाई दिए हैं. यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के Sentinel सैटेलाइट्स की तस्वीरों में पर्सियन गल्फ और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कई संदिग्ध तेल की परतें दिखी हैं. ये धब्बे मार्च से मई 2026 के बीच विभिन्न जगहों पर दिखे, जिनमें खार्ग द्वीप के पास एक बहुत बड़ा धब्बा 120 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ था.
रडार डेटा से पता चला कि ये पतली तेल की फिल्म जैसी दिख रही हैं, जो हवा से बनी छोटी लहरों को चपटा कर देती हैं. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट इमेज से 100% पुष्टि नहीं होती. ये शैवाल, प्राकृतिक फिल्म या अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, लेकिन जगह और समय को देखते हुए संदेह जताया जा रहा है कि यह स्टोरेज की कमी के कारण जानबूझकर तेल छोड़ा गया है या लीक हुआ है.
उत्पादन क्यों बंद नहीं कर सकता ईरान?
तेल कुओं को लंबे समय तक बंद रखने से पानी और गैस भंडार में घुस जाते हैं, चट्टानों की पारगम्यता कम हो जाती है और पाइपलाइनों में रुकावट आ जाती है. बाद में उत्पादन फिर शुरू करने पर बहुत ज्यादा खर्च आता है और कई बार पहले जितना तेल नहीं निकल पाता. इसलिए ईरान को मजबूरन उत्पादन जारी रखना पड़ रहा है.
समुंद्र में पर्यावरणीय जोखिम खड़ा हुआ
ये तेल की परतें समुद्री जीवन, मछली, कोरल रीफ और पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक हैं. ओमान के धोफार इलाके में मृत झींगों के बड़े पैमाने पर तट पर आने की खबर भी आई है, जिससे प्रदूषण की आशंका बढ़ गई है.
नाकाबंदी में भी तेल निकाल रहा ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अप्रैल 2026 के मध्य में शुरू की गई नाकाबंदी अभी भी जारी है. इसके बावजूद ईरान ने इंडोनेशिया के रियाउ द्वीपसमूह के पास दूर समुद्र में ship-to-ship ट्रांसफर के जरिए करीब 2.2 करोड़ बैरल तेल दूसरे जहाजों में ट्रांसफर किया. यह तेल मुख्य रूप से चीन पहुंचाया जा रहा है. अमेरिकी खुफिया आकलन के अनुसार ईरान इस नाकाबंदी को कई महीनों तक झेल सकता है. लेकिन स्टोरेज की समस्या बढ़ती जा रही है.
यह स्थिति बेहद विडंबनापूर्ण है कि दुनिया में तेल महंगा हो रहा है, फिर भी ईरान का तेल समुद्र में बेकार बहता नजर आ रहा है. चाहे ये जानबूझकर छोड़ा गया हो या दुर्घटना से, ईरान पर दबाव साफ दिख रहा है. ईरानी अधिकारियों ने इन स्लिक्स पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.