नई दिल्ली : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है. क्रूड महंगा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं.
रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल की बिक्री पर करीब 8 प्रति लीटर और डीजल पर 9 प्रति लीटर की नेगेटिव मार्केटिंग मार्जिन झेल रही हैं. इसके चलते इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलाकर करीब 530 करोड़ रोजाना का नुकसान होने का अनुमान है.
ICRA के अनुसार सितंबर में घरेलू एलपीजी पर भी करीब 300 प्रति सिलेंडर की अंडर-रिकवरी हो रही है. यानी तेल कंपनियों पर पेट्रोल-डीजल के साथ गैस का भी दबाव बढ़ रहा है. इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत तुरंत बढ़ने वाली है.
कीमत तय करने में अंतरराष्ट्रीय क्रूड के साथ रुपये-डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, टैक्स और अन्य खर्च भी अहम होते हैं. 29 सितंबर को भी देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे, जबकि ब्रेंट क्रूड करीब 106.93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था.
हालांकि, अगर पश्चिम एशिया का तनाव और क्रूड की महंगाई लंबे समय तक बनी रहती है, तो तेल कंपनियों के घाटे पर दबाव और बढ़ सकता है. ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आगे बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन फिलहाल किसी निश्चित बढ़ोतरी या तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.