पत्नी एक ही घर में अलग कमरे में रहती है तो क्या यह क्रूरता है? कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Amanat Ansari 27 Aug 2026 04:11 PM 1 Mins
पत्नी एक ही घर में अलग कमरे में रहती है तो क्या यह क्रूरता है? कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि एक ही मकान में अलग-अलग कमरों में रहना अपने आप में वैवाहिक क्रूरता नहीं माना जा सकता. अदालत ने पति की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की. मामला एक दंपति का है जिनकी शादी 11 नवंबर 2001 को हुई थी और उनके दो बच्चे हैं.

फैमिली कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर शादी भंग कर दी थी और पति को पत्नी को हर महीने 25,000 रुपए स्थायी भरण-पोषण देने का आदेश दिया था. पति ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया. जस्टिस डीके सिंह और जस्टिस एच. शांति भूषण की पीठ ने कहा कि पति-पत्नी अलग-अलग कमरों में रहते हैं. केवल इसी एक परिस्थिति के आधार पर क्रूरता के निष्कर्ष को सही नहीं ठहराया जा सकता.

अदालत ने हालांकि समग्र परिस्थितियों को देखते हुए मानसिक क्रूरता को सिद्ध माना. बार-बार के झगड़े, मौखिक गाली-गलौज, भावनात्मक उपेक्षा और सुलह की असफल कोशिशों ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता साबित की. कोर्ट ने कहा कि किसी जीवनसाथी से अनिश्चित काल तक ऐसा आचरण सहन करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती जो लगातार मानसिक पीड़ा पहुंचाए.

हाईकोर्ट ने पति के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई 498-ए की शिकायत (जिसमें पति बरी हो गए थे) को पत्नी की क्रूरता माना जाए. अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ शिकायत दर्ज कराना या बरी होना शिकायत के झूठे होने का प्रमाण नहीं है. भरण-पोषण के मामले में कोर्ट ने 25,000 रुपए मासिक राशि को बरकरार रखा और कहा कि पत्नी का रोजगार या अपनी आय होना उसे स्थायी भरण-पोषण पाने से वंचित नहीं करता.

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