नई दिल्ली: नेपाल-तिब्बत सीमा पर हालिया भीषण बाढ़ और हिमस्खलन से हुई तबाही के बाद विशेषज्ञों ने चीन के उस विशालकाय बांध पर फिर से लाल झंडा दिखाया है, जो भारत की सीमा के बेहद करीब बन रहा है. चीन तिब्बत के मेडोग काउंटी में यारलुंग जांगबो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर 60,000 मेगावाट क्षमता वाला मेडोग डैम बना रहा है. विशेषज्ञ इसे ‘वॉटर बम’ या ‘टिकिंग बम’ बता रहे हैं.
यह बांध भूकंपीय रूप से बेहद संवेदनशील जोन में स्थित है और अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है. चीन इसे 2033 तक चालू करने की योजना बना रहा है. हाल ही में चीन की ही सरकारी भूवैज्ञानिक सर्वे से जुड़े अध्ययन में पाया गया कि बांध स्थल के नीचे सक्रिय फॉल्ट लाइन है.
नेपाल में बुधवार को आई बाढ़ में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 750 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिनमें 100 से अधिक भारतीय (ज्यादातर कैलाश मानसरोवर यात्री) शामिल हैं. बाढ़ संभवतः तिब्बत में आए 4.4 तीव्रता के भूकंप या आइस एवलांच से ट्रिगर हुई थी.
रणनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेल्लानेय ने लिखा, “यह परियोजना भारत-तिब्बत सीमा के पास हिमालयी भूकंपीय बेल्ट में बन रही है. यह एक वॉटर बम है, जो भारत के पूर्वोत्तर को डुबो सकता है और बांग्लादेश तक तबाही मचा सकता है.” पूर्व राजदूत राजीव डोगरा ने भी चेतावनी दी कि अगर चीन यह विशाल बांध पूरा कर लेता है तो भारत के पूर्वोत्तर में और बड़ी तबाही हो सकती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि भारी बारिश के समय अचानक पानी छोड़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ेगा, जबकि सूखे के मौसम में पानी कम होने से कृषि और स्थानीय समुदायों पर असर पड़ेगा. भारत इस खतरे से निपटने के लिए अरुणाचल में 11,000 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. नेपाल को इस आपदा की कोई पूर्व चेतावनी चीन से नहीं मिली, जिससे भारत की चिंता और बढ़ गई है.