जेरूसलम: इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति (Central Elections Committee) ने शिन बेट (Shin Bet) को 27 अक्टूबर को हुए आम चुनावों में कथित विदेशी फंडिंग और रिश्वतखोरी की जांच करने का निर्देश दिया है. समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट जस्टिस नोआम सोहलबर्ग ने शिन बेट प्रमुख डेविड ज़िनी को पत्र लिखकर “गंभीर संदेहों” की जांच का आदेश दिया है.
क्या है मामला?
सोहलबर्ग ने पत्र में लिखा कि उनके संज्ञान में ऐसे संदेह आए हैं कि विदेशी संस्थाओं ने इजरायल के हितों के खिलाफ धन भेजकर चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि इन आरोपों की पूरी जांच जरूरी है ताकि चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता बनी रहे. जांच के निष्कर्ष एक सप्ताह के अंदर पेश करने को कहा गया है.
इजरायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, संदेह कतर और तुर्की से जुड़े फंडिंग पर केंद्रित है. आरोप है कि अरब समुदाय में मतदान बढ़ाने के लिए अवैध तरीके से बड़ी रकम भेजी गई. कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि यह धन आतंकवाद से जुड़े पुराने चैनलों के जरिए भेजा गया हो सकता है. यनेट ने कथित रकम को करोड़ों में बताया है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
चुनाव समिति के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह जांच अंतिम नतीजों की घोषणा या राष्ट्रपति द्वारा सरकार बनाने की प्रक्रिया में देरी नहीं करेगी. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब दलों के खिलाफ व्यापक चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं और कतर की संदिग्ध भूमिका का जिक्र किया है. वहीं, कतर ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
अलग से, पुलिस ने रा’म (Ra’am) पार्टी के लिए वोट खरीदने के संदेह में कई लोगों को गिरफ्तार किया है. कुछ रिपोर्टों में सात गिरफ्तारियों का जिक्र है. अरब दलों ने इस चुनाव में अब तक की सबसे अच्छी सीटें (करीब 19) हासिल की हैं और किसी भी गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. इस पृष्ठभूमि में जांच राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गई है.