नई दिल्ली: 9 जून 2025 को तड़के इजरायली सेना ने गाजा की नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रही एक सहायता नाव को रोक लिया. इस नाव में स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और फ्रांसीसी यूरोपीय संसद सदस्य (MEP) रीमा हसन सहित कई अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ता सवार थे. यह नाव, जिसका नाम मेडलीन था और जो ब्रिटिश झंडे के तहत चल रही थी, फिलिस्तीन समर्थक फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन (FFC) द्वारा आयोजित एक मिशन का हिस्सा थी. FFC के अनुसार, यह नाव 6 जून को सिसिली से रवाना हुई थी और आज गाजा पहुंचने वाली थी, लेकिन इजरायली सैनिकों ने इसे रोक लिया.
रीमा हसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि नाव के सभी क्रू मेंबर्स को इजरायली सेना ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में सुबह 2 बजे गिरफ्तार कर लिया. इजरायली विदेश मंत्रालय ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें इजरायली सेना नाव पर कब्जा करती दिख रही है और क्रू मेंबर्स को, जो लाइफ जैकेट पहने थे, खाने-पीने की चीजें दे रही थी. मंत्रालय ने लिखा, "12 लोगों के क्रू के साथ यह नाव प्रतीकात्मक रूप से मानवीय सहायता, जैसे चावल और बेबी फॉर्मूला, ले जा रही थी." मंत्रालय ने इस मिशन को "मीडिया उकसावा" करार दिया और इसे "सेलिब्रिटीज़ की सेल्फी यॉट" कहा.
उन्होंने दावा किया कि नाव में मौजूद सहायता सामग्री "एक ट्रक लोड से भी कम" थी और इसका ज्यादातर हिस्सा कार्यकर्ताओं ने खुद खा लिया था. मंत्रालय ने यह भी कहा कि बची हुई सहायता सामग्री को गाजा में स्थापित मानवीय चैनलों के माध्यम से भेजा जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो हफ्तों में इजरायल से गाजा में 1,200 से ज्यादा सहायता ट्रक भेजे गए हैं और गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन ने करीब 1.1 करोड़ भोजन पैकेट बांटे हैं.
यह घटना अंतरराष्ट्रीय नागरिक समाज समूहों द्वारा गाजा में चल रहे "मानवीय संकट" की ओर ध्यान खींचने की ताजा कोशिश है. गाजा में कई सालों से इजरायली नौसैनिक नाकाबंदी लागू है. FFC ने इस नाकाबंदी को सामूहिक सजा का रूप बताया है और बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता की मांग की है. पिछले ढाई महीने तक हमास पर दबाव बनाने के लिए इजरायल ने गाजा पर पूरी तरह नाकाबंदी लागू की थी.
पिछले महीने इजरायल ने सीमित मात्रा में मानवीय सहायता की अनुमति दी, लेकिन राहत संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर नाकाबंदी पूरी तरह नहीं हटाई गई और सैन्य कार्रवाइयां बंद नहीं हुईं, तो गाजा अकाल के कगार पर है. पिछले महीने FFC की एक अन्य समुद्री सहायता कोशिश नाकाम रही थी, जब माल्टा के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उनकी एक नाव पर ड्रोन हमला हुआ. FFC ने इस हमले के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें नाव का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था. 2007 में हमास के गाजा पर कब्जे के बाद से इजरायल और मिस्र ने इस तटीय क्षेत्र पर अलग-अलग स्तर की नाकाबंदी लागू की है. आलोचकों का कहना है कि ये प्रतिबंध, जो लोगों और सामान की आवाजाही को सीमित करते हैं.