इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में तनाव के बीच ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने विरोध प्रदर्शनों के नए दौर की घोषणा कर दी है. समिति ने बुनियादी अधिकारों के हनन, स्वास्थ्य और शिक्षा की बदहाली तथा प्रदर्शनकारियों के कथित उत्पीड़न के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है. रावलकोट में हुई बैठक में JAAC ने विरोध प्रदर्शनों और जन लामबंदी का पूरा कार्यक्रम अंतिम रूप दिया. समिति ने साफ कहा कि मांगें पूरी होने तक शांतिपूर्ण राजनीतिक संघर्ष जारी रखा जाएगा.
आंदोलन का पूरा प्लान
26 अगस्त (12 रबी-उल-अव्वल) को पूरे क्षेत्र में ‘क्रांति के पैगंबर सम्मेलन’ के साथ विरोध प्रदर्शन होंगे. धार्मिक विद्वानों से पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं और उत्पीड़न, अत्याचार व शोषण के खिलाफ उनके संघर्ष पर बोलने का आग्रह किया गया है. 29 अगस्त को ‘मेरे लिए स्वास्थ्य और शिक्षा क्यों नहीं?’ नारे के तहत प्रदर्शन होंगे. ये प्रदर्शन स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और चिकित्सा सुविधाओं की कथित कमियों पर केंद्रित रहेंगे. महिलाओं और छात्रों से विशेष रूप से भाग लेने की अपील की गई है. रावलकोट धरने में शामिल होने वालों से वर्दी में आने का अनुरोध किया गया है.
समिति ने रावलकोट, इस्लामपुर और अन्य इलाकों से जबरन लापता किए गए लोगों की तत्काल बरामदगी व रिहाई की मांग की है. इसमें कोटली के सदस्य जिया-उल-मलिक, फैसल मंशा, मोहम्मद बिलावल और कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर का नाम शामिल है. रावलपिंडी और इस्लामाबाद में गिरफ्तार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों (महिलाओं व छात्रों सहित) की रिहाई भी मांगी गई है. JAAC ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर पीओके को खाद्य सामग्री और दवाइयों की आपूर्ति बाधित करने का आरोप लगाया है. साथ ही पंजाब पुलिस द्वारा ट्रांसपोर्टरों से कथित पैसे वसूली की निंदा की गई है.
विदेश में रहने वाले कश्मीरियों से 30 अगस्त को लंदन में होने वाले दस लाख के मार्च में भाग लेने और ब्रिटिश सांसदों से बात करने की अपील की गई है. इससे पहले समिति बिजली बिलों और अन्य करों के बहिष्कार का आह्वान भी कर चुकी है. यह आंदोलन आर्थिक राहत, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और अधिक अधिकारों की मांगों पर आधारित व्यापक अभियान का हिस्सा है.