Nitin Gadkari Threat Case: नागपुर की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari को 2023 में धमकी भरे फोन कॉल करने के मामले में दो लोगों को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत दोषी ठहराते हुए पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार के शर्मा ने कुख्यात अपराधी जयेश पुजारी उर्फ कांथा और आतंकवाद के आरोपी अफसर पाशा को भारतीय दंड संहिता (IPC) और कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया. दोनों फिलहाल नागपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं.
अदालत ने उन्हें IPC की धारा 385 और 387 (मौत या गंभीर चोट का डर दिखाकर जबरन वसूली), 506(2) और 507 (आपराधिक धमकी), 34 (साझा मंशा) तथा UAPA की धारा 10 (गैरकानूनी संगठन का सदस्य होना), 13(1) (गैरकानूनी गतिविधियों में भाग लेना) और 18 (आतंकी कृत्य के लिए साजिश, उकसावा या सहायता) के तहत दोषी पाया. हालांकि, अदालत ने दोनों को UAPA की धारा 20 (आतंकी संगठन या गिरोह का सदस्य होने) के आरोप से बरी कर दिया.
उन्हें अलग-अलग धाराओं के तहत दो से पांच साल तक के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई. सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, पहली धमकी भरी कॉल 14 जनवरी 2023 को मंत्री गडकरी के नागपुर स्थित जनसंपर्क कार्यालय में आई थी. कॉल करने वालों ने कथित तौर पर 100 करोड़ रुपए की मांग की और Dawood Ibrahim गिरोह से संबंध होने का दावा किया.
उस समय दोनों आरोपी कर्नाटक के बेलगावी स्थित हिंदालगा केंद्रीय जेल में बंद थे. दूसरी कॉल 21 मार्च 2023 को की गई, जिसमें आरोपियों ने कथित तौर पर 10 करोड़ रुपए नहीं देने पर मंत्री की हत्या और बम विस्फोट करने की धमकी दी. इन धमकियों के बाद नागपुर के धंतोली पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी जेल के अंदर से अवैध रूप से मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे. जब्त मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में तालिबान जिंदाबाद, TTP और अन्य चरमपंथी संदर्भों वाले संदेश मिले.
जांच में आरोपियों के प्रतिबंधित संगठनों जैसे Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP) और डी-गैंग से कथित संबंध भी सामने आए. जांचकर्ताओं ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, बैंक लेन-देन, जेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयान के आधार पर साजिश साबित की. आरोपी अफसर पाशा की पृष्ठभूमि ने मामले को और गंभीर बना दिया.
पाशा का पहले भी आतंकवादी गतिविधियों से संबंध बताया गया था. जांच एजेंसियों के अनुसार उसके संबंध Lashkar-e-Taiba (LeT) के ऑपरेटिव्स से थे और उसने कथित रूप से बांग्लादेश में बम बनाने का प्रशिक्षण लिया था. जांचकर्ताओं को 2022 के Mangaluru cooker bomb blast मामले में शामिल लोगों को प्रशिक्षण देने में उसकी भूमिका पर भी शक था.
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पाशा और पुजारी हिंदालगा जेल के कैदियों के बीच कट्टरपंथी विचार फैला रहे थे. जेल के अंदर अवैध वित्तीय लेन-देन और स्मार्टफोन के इस्तेमाल के सबूत भी मिले. तीसरा आरोपी मोहम्मद शाकिर अभी फरार है और उसके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 299 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है. मुकदमा 55 दिनों में पूरा हुआ, जिसके दौरान दोनों मामलों में 67 गवाहों के बयान दर्ज किए गए.