नई दिल्ली: संभल जिले में नवंबर 2024 की जामा मस्जिद सर्वे से जुड़ी हिंसा के मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रांसफर कर दिया है. उन्हें संभल से हटाकर सुल्तानपुर जिले में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर भेजा गया है.
यह तबादला 20 जनवरी 2026 को जारी हुए हाईकोर्ट के प्रशासनिक आदेश के तहत हुआ, जिसमें कुल 14 न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण शामिल थे. विभांशु सुधीर का नाम इस लिस्ट में प्रमुख था. उनके स्थान पर चंदौसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह को संभल का नया CJM नियुक्त किया गया है.
क्या था उनका विवादित आदेश?
संभल हिंसा के दौरान घायल हुए युवक आलम के पिता यामीन ने अदालत में याचिका दायर की थी. इसमें पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसमें दावा किया गया कि पुलिस ने बिना उकसावे के फायरिंग की और निर्दोष व्यक्ति को निशाना बनाया.
9 जनवरी 2026 को CJM विभांशु सुधीर ने इस याचिका पर सुनवाई के बाद बड़ा फैसला सुनाया. आदेश में तत्कालीन सर्कल ऑफिसर (CO) अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर, और कुल 15-22 अज्ञात/अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया.
यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत पारित किया गया था. आदेश के बाद संभल पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया. संभल के SP कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा था कि विभाग उच्च न्यायालय में अपील करेगा और फिलहाल FIR दर्ज नहीं की जाएगी. पुलिस का पक्ष था कि कर्मी केवल ड्यूटी निभा रहे थे.
पद में बदलाव का मतलब
CJM से सिविल जज (सीनियर डिवीजन) पर स्थानांतरण को न्यायिक और प्रशासनिक शब्दावली में एक पायदान नीचे माना जा रहा है, जिसे कई लोग डिमोशन जैसा देख रहे हैं. हालांकि, यह हाईकोर्ट का रूटीन ट्रांसफर आदेश है, लेकिन संभल हिंसा मामले के संदर्भ में यह काफी चर्चा में है. नवंबर 2024 में अदालत के आदेश पर जामा मस्जिद (जिसे कुछ याचिकाकर्ता प्राचीन हरिहर मंदिर के अवशेष पर बनी बताते हैं) का सर्वे हुआ.
24 नवंबर को दूसरे सर्वे के दौरान अफवाहें फैलीं कि मस्जिद में खुदाई हो रही है, जिससे भीड़ भड़क गई. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत हुई और लगभग 29 सुरक्षाकर्मी घायल हुए.