भोपाल: अजाक्स (अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण संगठन) के प्रांतीय अधिवेशन में मध्यप्रदेश के वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष कुमार वर्मा ने विवादास्पद बयान दे दिया. उन्होंने मंच से कहा, ''जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी नहीं देगा, तब तक आरक्षण खत्म नहीं होना चाहिए.'' इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद चारों तरफ आक्रोश फैल गया. मामला इतना बढ़ गया कि क्षत्रिय करणी सेना भी मैदान में कूद पड़ी.
क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष ओकेंद्र सिंह राणा ने फेसबुक पर बेहद आपत्तिजनक पोस्ट लिखी. उन्होंने IAS संतोष वर्मा को देखते ही ''गाड़ी चढ़ाकर आमलेट बना देने'' की धमकी दी. भारी विरोध के बाद उन्होंने यह पोस्ट डिलीट कर दी, लेकिन स्क्रीनशॉट वायरल हो चुके हैं.
रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा ने कार्मिक मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर संतोष वर्मा की पूरी सेवा-यात्रा पर सवाल उठाए हैं. सांसद ने आरोप लगाया है कि संतोष वर्मा मूल रूप से SC कैटेगरी के थे, लेकिन IAS बनने के लिए खुद को ST दिखाकर फायदा उठाया. 2021 में एक महिला से मारपीट और अभद्रता के मामले में कोर्ट में फर्जी समझौता दिखाने के कारण इनकी गिरफ्तारी हुई थी और ये जेल भी गए थे. वह मुकदमा अभी भी कोर्ट में चल रहा है, फिर भी इनकी राज्य प्रशासनिक सेवा से IAS में पदोन्नति कर दी गई.
सांसद ने मांग की है कि इनकी पदोन्नति की CBI या उच्चस्तरीय जांच हो. अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 के तहत तत्काल निलंबन और दंडात्मक कार्रवाई हो, इन्हें IAS से पदावनत (डिमोट) किया जाए.
संतोष वर्मा के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर ब्राह्मण संगठन से लेकर सामान्य वर्ग के लोग आक्रोशित हैं. दूसरी तरफ दलित संगठन भी अपने अधिकारी के बचाव में उतर आए हैं. पूरे मामले ने मध्यप्रदेश में जातीय तनाव को हवा दे दी है. अब सभी की निगाहें सरकार और कार्मिक मंत्रालय पर टिकी हैं कि इतने गंभीर आरोपों और विवादित बयान के बाद आखिर IAS संतोष वर्मा पर क्या कार्रवाई होती है.