UGC protest: सतना में यूजीसी के हालिया नियमों के खिलाफ बड़ा विरोध देखने को मिला. शहर के सर्किट हाउस चौक पर 'सर्व समाज' के नाम से विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्रों और राजनीतिक समूहों ने एक बड़ा जुटाव किया. सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने यूजीसी के इन नए प्रावधानों को 'काला कानून' कहकर आक्रोश जताया.
प्रदर्शनकारियों ने आयोग का पुतला जलाया और जोर-जोर से नारे लगाए. उनका मुख्य मुद्दा यह था कि ये नियम भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और एक खास वर्ग को निशाना बनाते हैं. प्रदर्शन में शामिल शशांक सिंह बघेल जैसे कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर ये नियम लागू हुए तो सामान्य छात्रों और शिक्षकों को मानसिक परेशानी होगी. उन्होंने दावा किया कि यह शिक्षा संस्थानों के हितों के खिलाफ है और इसे फौरन रद्द किया जाना चाहिए.
वक्ताओं ने अदालत के हालिया फैसले का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी है और दुरुपयोग की आशंका जताई है. फिर भी केंद्र की ओर से इन्हें वापस न लेना लोगों को नागवार गुजर रहा है.
पूरे प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भारी तैनाती रही. माहौल तनावपूर्ण था, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. सभी ने एकमत होकर मांग की कि विवादित नियम पूरी तरह खत्म किए जाएं और शिक्षा में निष्पक्ष, पारदर्शी नीतियां बनाई जाएं. अगर ये नियम नहीं हटाए गए तो आंदोलन और तेज होने की चेतावनी भी दी गई.
पिथौरागढ़ में जोरदार प्रदर्शन
पिथौरागढ़ में कई संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. विभिन्न सामाजिक और छात्र संगठन, मुख्य रूप से अखिल भारतीय समानता मंच के बैनर तले, जिला कलक्ट्रेट परिसर में एकत्र हुए. प्रदर्शनकारियों ने प्लेकार्ड और नारे लगाते हुए इस नए नियमावली को सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के छात्रों के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया. उनका आरोप है कि यह नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत आधार पर शिकायतों के नाम पर सामान्य वर्ग के युवाओं को झूठे आरोपों में फंसाने का माध्यम बन सकता है, जिससे उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा. प्रदर्शन के बाद उन्होंने डिप्टी कमिश्नर (डीएम) के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें इस प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 को तुरंत वापस लेने की मांग की गई.
जेएनयू में पक्ष में प्रदर्शन
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली में हाल ही में एक तीखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. साबरमती हॉस्टल के बाहर लगभग 50 छात्र एकजुट हुए और ब्राह्मणवाद का प्रतीकात्मक पुतला जलाया. यह प्रदर्शन यूजीसी (University Grants Commission) द्वारा हाल में जारी इक्विटी प्रमोशन रेगुलेशंस 2026 से जुड़ा था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. छात्रों ने इसे अकादमिक ब्राह्मणवाद का प्रतीक बताते हुए विरोध जताया और कहा कि कोर्ट की इस रोक से सामाजिक न्याय पर हमला हुआ है.
प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा यह था कि यूजीसी के ये नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं. वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक को पीछे हटना मान रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि इन नियमों को तुरंत बहाल किया जाए.
कुछ छात्र संगठनों ने इसे रोहित एक्ट (Rohith Act) लागू करने की मांग से भी जोड़ा, जो रोहित वेमुला मामले से जुड़ा लंबित मुद्दा है. प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए गए और यह जेएनयू कैंपस पर हुई घटना को लेकर काफी चर्चा में रहा. यह विरोध UGC नियमों पर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है, जहां एक तरफ सामान्य वर्ग के छात्र इन्हें भेदभावपूर्ण बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ वंचित समुदायों के छात्र इन्हें जरूरी सुरक्षा कवच मान रहे हैं.