स्टॉक गवाहों के चक्कर में बुरी तरह फंसे इंदौर के SHO, सुप्रीम कोर्ट ने चलाया हंटर, तुरंत हटाने का आदेश

Amanat Ansari 19 Jan 2026 02:34: PM 2 Mins
स्टॉक गवाहों के चक्कर में बुरी तरह फंसे इंदौर के SHO, सुप्रीम कोर्ट ने चलाया हंटर, तुरंत हटाने का आदेश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में चंदन नगर पुलिस थाने के थाना प्रभारी (SHO) इंद्रमणि पटेल को जांच और पुलिस स्टेशन से जुड़े सभी कामों से तत्काल हटाने का सख्त आदेश दिया है.

कोर्ट ने इस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कई आपराधिक मामलों में बार-बार एक ही लोग को गवाह के रूप में पेश किया या इसकी इजाजत दी, जिसे स्टॉक गवाह या पॉकेट विटनेस कहा जाता है. अदालत की नजर में यह प्रथा जांच की निष्पक्षता को पूरी तरह नष्ट करती है और कानून के शासन वाले देश के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है.  

13 जनवरी जारी हुआ था अंतरिम आदेश

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने 13 जनवरी 2026 को यह अंतरिम आदेश दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि पटेल को पुलिस लाइन्स में भेज दिया जाए और उन्हें किसी भी जांच, पर्यवेक्षण या थाने में तैनाती का कोई काम नहीं सौंपा जाए. कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर पटेल किसी भी तरह से किसी पुलिस मामले में दखल देने की कोशिश करते हैं, तो इंदौर के पुलिस कमिश्नर खुद इसके लिए जिम्मेदार ठहराए जाएंगे और अदालत के सामने जवाबदेह होंगे.

पुलिस पर पक्षपातपूर्ण जांच करने का आरोप

यह फैसला एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) के दौरान आया, जिसमें आरोपी अनवर हुसैन ने पुलिस पर पक्षपातपूर्ण जांच और गलत तरीकों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था. कोर्ट ने पाया कि एक ही थाने से जुड़े सैकड़ों मामलों (कुछ रिपोर्टों में 165 से 176 तक) में कुछ ही तयशुदा व्यक्तियों को गवाह बनाया गया, जो जांच की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल उठाता है.

अवैध रूप से हिरासत में रखने का भी आरोप

इसके अलावा, कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक अन्य मामले का भी जिक्र किया, जहां 4 दिसंबर 2025 के आदेश में पटेल पर राजा दुबे को बिना केस दर्ज किए 26 नवंबर 2025 को अवैध रूप से हिरासत में रखने और हथकड़ी लगाने का आरोप लगा था. पटेल ने कोर्ट में यह बात मानी, लेकिन हथकड़ी के लिए कोई वैध आदेश नहीं दिखा सके. हाई कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का गंभीर उल्लंघन माना था.

मध्य प्रदेश सरकार भी कटघरे में

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को आदेश का पालन करने की पुष्टि के लिए हलफनामा दाखिल करने को कहा है. साथ ही निर्देश दिया कि यह फैसला तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाए, भले ही लिखित आदेश की कॉपी अभी उपलब्ध न हो. अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी. 

Stock witness Indore SHO Supreme Court Indore Police Commissioner

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