Barkatullah University: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने का फैसला लिया गया है. विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने 3 जून को प्रस्ताव पास कर दिया कि अब इसका नया नाम मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय (Maa Vagdevi Bhojpal University) होगा. यह प्रस्ताव अब राज्यपाल मंगुभाई पटेल की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है.
नाम बदलने का कारण
प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया है कि भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए राजा भोज का नाम ज्यादा उपयुक्त है. कार्यपरिषद ने राजा भोज और स्वतंत्रता सेनानी बरकतुल्ला भोपाली की तुलना करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के विकास और ज्ञान-विज्ञान के प्रसार में राजा भोज का योगदान कहीं अधिक है.
राजा भोज की विरासत
राजा भोज परम विद्वान, लेखक और कला प्रेमी थे. उन्होंने लगभग 80 ग्रंथ लिखे, जिनमें से 27 आज भी उपलब्ध हैं. उन्होंने अपनी राजधानी धारा (धार) को उस समय का प्रमुख ज्ञान केंद्र बनाया था. यहां उन्होंने भोजशाला (सरस्वती मंदिर) की स्थापना की, जो प्राचीन काल का एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय था. भोजशाला में स्थापित वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा आज भी इंग्लैंड के एक संग्रहालय में रखी हुई है. राजा भोज को 1000 वर्षों तक विद्या की देवी सरस्वती के रूप में पूजा जाता रहा.
बरकतुल्लाह का नाम कब और क्यों पड़ा?
वर्ष 1988 में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय रखा गया था. मौलाना मोहम्मद बरकतुल्ला भोपाली भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी थे. उन्होंने विदेश में रहकर ब्रिटिश विरोधी अभियान चलाए, गदर पार्टी से जुड़े और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाने की कोशिश की. उनका निधन 1927 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में हुआ था.
अब विश्वविद्यालय के नाम में बदलाव के साथ ही अकादमिक ढांचे में भी कुछ बदलाव किए जाने का फैसला लिया गया है. यह फैसला भोपाल की सांस्कृतिक पहचान और प्राचीन ज्ञान परंपरा को फिर से मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.